ईरान से जुड़े बढ़ते युद्ध और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर नई चिंता सामने आई है। रूस के रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के सीईओ किरिल दिमित्रीव ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध और तेज़ होता है और तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
सप्लाई चेन पर खतरा
दिमित्रीव ने कहा कि मध्य पूर्व में स्थिति बहुत संवेदनशील है और किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की रुकावट से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। यह समुद्री मार्ग खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है।
ऊर्जा बाजार में बढ़ सकती है उथल-पुथल
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही पश्चिमी देशों द्वारा रूसी तेल पर लगाए गए प्रतिबंध और अब ईरान से जुड़ा तनाव ऊर्जा बाजार को और अस्थिर बना सकता है। दिमित्रीव ने कहा कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो तेल की कीमतों में अचानक तेज़ उछाल देखने को मिल सकता है।
वैश्विक मंदी का खतरा
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ेगी और कई देशों में आर्थिक मंदी का खतरा भी पैदा हो सकता है।
भारत पर पड़ सकता है बड़ा असर
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो इसका असर पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों पर पड़ेगा और महंगाई भी बढ़ सकती है।
निवेशकों में बढ़ी चिंता
दुनिया भर के शेयर बाजार पहले से ही तेल आपूर्ति को लेकर चिंतित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में इस तरह की चेतावनियां निवेशकों की चिंता को और बढ़ा सकती हैं और वैश्विक बाजार में अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
तेल उत्पादक देशों से सहयोग की उम्मीद
दिमित्रीव ने कहा कि रूस लगातार OPEC+ देशों के संपर्क में है और इस संकट से निपटने के लिए तेल उत्पादक देशों को मिलकर काम करना होगा। हालांकि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतों को नियंत्रित करना काफी मुश्किल हो सकता है।
