मिडिल ईस्ट में जारी जंग को अब 20 दिन हो चुके हैं और यह संघर्ष लगातार खतरनाक रूप लेता जा रहा है। शुरुआत में जहां सैन्य ठिकानों और नेताओं को निशाना बनाया गया था, वहीं अब जंग का फोकस पूरी तरह ऊर्जा (एनर्जी) सेक्टर पर आ गया है। तेल और गैस के बड़े ठिकाने अब इस युद्ध के मुख्य लक्ष्य बन चुके हैं।
जंग का बदलता स्वरूप
पहले इस जंग में सैन्य ठिकानों और नेताओं पर हमले किए गए। इसके बाद समुद्री मार्गों को निशाना बनाया गया, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम रास्ते असुरक्षित हो गए। अब यह जंग आर्थिक मोर्चे पर पहुंच गई है, जहां देशों की ऊर्जा आपूर्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
खर्ग द्वीप पर हमला
इस संघर्ष में ईरान के खर्ग द्वीप पर हमला एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है और यहां से करीब 90% कच्चा तेल एक्सपोर्ट होता है। इस पर हमले से ईरान की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ा।
साउथ पार्स गैस फील्ड निशाने पर
इसके बाद इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स को निशाना बनाया। यह दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडारों में से एक है और ईरान की लगभग 70% गैस सप्लाई यहीं से होती है। हमले के बाद यहां आग लगने की खबरें सामने आईं।
कतर और यूएई पर भी असर
जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कतर के रास लाफान LNG हब को निशाना बनाया, जो दुनिया का सबसे बड़ा गैस केंद्र माना जाता है। इसके अलावा अबू धाबी की रुवैस रिफाइनरी और सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी पर भी हमले हुए हैं। इन हमलों से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर खतरा बढ़ गया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इन हमलों का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कीमतों में तेजी आई है, जिससे कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका है।
बढ़ता खतरा और अनिश्चितता
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह जंग इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। इससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ेगी और आर्थिक हालात बिगड़ सकते हैं।अब यह साफ हो चुका है कि जंग सिर्फ सैन्य ताकत तक सीमित नहीं रही, बल्कि आर्थिक नुकसान पहुंचाने की दिशा में बढ़ गई है। आने वाले दिनों में अगर ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी रहे, तो इसका असर पूरी दुनिया को झेलना पड़ सकता है।
