पंजाब में स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ी सौगात
पंजाब सरकार राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में कपूरथला में एक नए सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना की घोषणा की गई है। इस परियोजना की जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। यह इस महीने घोषित किया गया दूसरा बड़ा मेडिकल संस्थान है, इससे पहले होशियारपुर में भी एक मेडिकल साइंसेज संस्थान की घोषणा हो चुकी है।
जिला अस्पताल में ही बनेगा आधुनिक संस्थान
कपूरथला में बनने वाला यह मेडिकल कॉलेज “श्री गुरु नानक देव जी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज” के नाम से स्थापित किया जाएगा। खास बात यह है कि इसे मौजूदा जिला अस्पताल परिसर में ही विकसित किया जाएगा, जिससे निर्माण कार्य में तेजी आएगी और पहले से मौजूद सुविधाओं का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इस कदम से स्थानीय लोगों को अपने ही शहर में बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
निर्माण कार्य जल्द होगा शुरू
डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। टेंडरिंग और अन्य औपचारिकताओं के बाद संबंधित एजेंसियों को काम सौंप दिया गया है। निर्माण कार्य 25 मार्च 2026 से शुरू होगा और इसे लगभग 24 महीनों में यानी मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का प्रयास है कि यह प्रोजेक्ट तय समय में पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा हो।
275 करोड़ की लागत, 300 बेड का अस्पताल
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर करीब 275 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें 300 बिस्तरों वाला आधुनिक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज दोनों शामिल होंगे। कॉलेज में हर साल 100 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होंगी, जिससे राज्य के छात्रों को मेडिकल शिक्षा के लिए बाहर या विदेश जाने की जरूरत कम होगी।
शिक्षा और रोजगार के नए अवसर
इस नए संस्थान के शुरू होने से पंजाब में मेडिकल शिक्षा का स्तर और बेहतर होगा। साथ ही, यह परियोजना रोजगार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित होगी। अनुमान है कि इससे सीधे तौर पर 1000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा, जबकि कई अन्य लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से काम के अवसर मिलेंगे।
लोगों को मिलेगा बेहतर इलाज
इस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के शुरू होने के बाद कपूरथला और आसपास के इलाकों के लोगों को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। सेकेंडरी और टर्शियरी स्तर की सुविधाएं मिलने से मरीजों को बड़े शहरों का रुख करने की जरूरत कम होगी।
