मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब और खतरनाक मोड़ ले चुका है। ईरान ने शनिवार को हिंद महासागर में स्थित अमेरिका और ब्रिटेन के रणनीतिक सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया पर दो मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह पहली बार है जब इस दूरी पर हमला करने की कोशिश की गई, जिससे युद्ध का दायरा काफी बढ़ गया है।
मिसाइलें हवा में ही नाकाम
रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों मिसाइलों को अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने हवा में ही नष्ट कर दिया। एक मिसाइल उड़ान के दौरान ही फेल हो गई, जबकि दूसरी को अमेरिकी इंटरसेप्टर मिसाइल (SM-3) ने मार गिराया। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
डिएगो गार्सिया का महत्व
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित एक बेहद अहम सैन्य अड्डा है, जिसे अमेरिका और ब्रिटेन मिलकर संचालित करते हैं। यह बेस अफगानिस्तान और इराक जैसे क्षेत्रों में सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इस पर हमला करने की कोशिश को रणनीतिक तौर पर बेहद गंभीर माना जा रहा है।
दुबई में भी बढ़ा तनाव
इस हमले के तुरंत बाद दुबई में भी एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो गया और कई जगहों पर धमाकों की आवाजें सुनी गईं। अधिकारियों ने बताया कि एक संभावित हवाई खतरे को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया गया है। लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सतर्क रहने की अपील की गई है।
विशेषज्ञों की बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि 4,000 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य पर हमला करने की कोशिश यह संकेत देती है कि ईरान की मिसाइल क्षमता पहले से ज्यादा विकसित हो चुकी है। इससे यूरोप और अन्य दूर के क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना पर पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह कदम युद्ध के दायरे को और बढ़ाता है और पश्चिमी देशों के लिए एक बड़ा संदेश है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ब्रिटेन की आलोचना करते हुए कहा कि यह कदम क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रहा है।
वैश्विक असर और खतरा
इस हमले के बाद यह साफ हो गया है कि युद्ध अब केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहा। खाड़ी देशों में सुरक्षा और पर्यटन पर भी इसका असर पड़ने लगा है।
