पंजाब ने शिक्षा क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और समग्र विकास को • अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। पंजाब सरकार द्वारा स्कूलों की गुणवत्ता को निजी संस्थानों के समकक्ष लाने के लिए योजनाबद्ध और केंद्रित प्रयास किए जा रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि आज राज्य के स्कूल आधुनिक सुविधाओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
शिक्षकों को सशक्त बनाना इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इसी दिशा में आईआईटी मद्रास के सहयोग से 5,000 से अधिक शिक्षकों के लिए एक मुफ्त ऑनलाइन करियर मेंटर ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया गया है। यह कार्यक्रम फाउंडेशनल करियर काउंसलिंग, क्लासरूम मैनेजमेंट स्किल्स, वन ऑन-वन गाइडेंस और उभरते करियर विकल्पों पर डिजिटल संसाधनों की सुविधा देता है।
इसके साथ ही 25,000 शिक्षकों के लिए डिजिटल साक्षरता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कौशल विकसित करने हेतु गूगल सर्टिफिकेशन प्रोग्राम भी शुरू किया गया है। पंजाब सरकार के नेतृत्व में 234 प्रिंसिपल और शिक्षा अधिकारियों को सिंगापुर में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, 152 हेड टीचरों को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद में एडवांस्ड कोचिंग और 144 प्राइमरी शिक्षकों को फिनलैंड की यूनिवर्सिटी में विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया है।
शिक्षकों को प्रशासनिक बोझ से मुक्त करने के लिए 1,920 कैंपस मैनेजर नियुक्त किए गए हैं, जिससे वे अपने मुख्य कार्य – शिक्षण — पर पूरा ध्यान दे सकें।
राज्य में 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए गए हैं, जिन पर 231.74 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन स्कूलों में मुफ्त यूनिफॉर्म, लड़कियों के लिए बस सेवा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निशुल्क कोचिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। स्मार्ट क्लासरूम, हाई-टेक लैब और आधुनिक लाइब्रेरी से सुसज्जित ये स्कूल सामाजिक समानता का प्रतीक बन चुके हैं, जहां अमीर-गरीब का भेद समाप्त हो गया है।
पंजाब की यह शिक्षा क्रांति न केवल ढांचे को बदल रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सपनों को भी नई उड़ान दे रही है।
