अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया संबोधन के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि WTI क्रूड भी 103–104 डॉलर के करीब पहुंच गया।
पहले जहां तेल की कीमतें 100 डॉलर के आसपास थीं, वहीं ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ी और कीमतों में अचानक तेजी आ गई।
ईरान-अमेरिका तनाव बना सबसे बड़ा कारण
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। ट्रंप ने अपने संबोधन में साफ संकेत दिया कि आने वाले 2–3 हफ्तों में ईरान के खिलाफ और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
इसके अलावा उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि यह संघर्ष कब खत्म होगा, जिससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई। इसी कारण निवेशकों ने तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता जताई और कीमतें बढ़ने लगीं।
होरमुज जलडमरूमध्य पर संकट का असर
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर भी संकट बना हुआ है। यह रास्ता वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।
ट्रंप के भाषण में इस मार्ग को खोलने की बात तो कही गई, लेकिन कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। इससे सप्लाई बाधित होने का खतरा बना हुआ है, जो कीमतों में उछाल का बड़ा कारण है।
निवेशकों में डर, बाजार में उतार-चढ़ाव
तेल की कीमतों में इस तेजी के चलते वैश्विक बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। निवेशकों को डर है कि अगर हालात और बिगड़े, तो ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चितता और युद्ध जैसे हालात में तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं, क्योंकि सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।
भारत पर पड़ सकता है सीधा असर
भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करते हैं, उनके लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।
इसके अलावा सरकार पर सब्सिडी और खर्च का दबाव भी बढ़ सकता है, जिससे आर्थिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
सोने और डॉलर पर भी दिखा असर
तेल की कीमतों में तेजी के साथ-साथ डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की मांग कमजोर पड़ जाती है।
