मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने पूरी दुनिया के बाजारों को हिला कर रख दिया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिया गया 48 घंटे का अल्टीमेटम और ईरान का सख्त रुख इस तनाव को और बढ़ा रहा है। ऐसे हालात में आमतौर पर लोग सोना-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश की ओर भागते हैं, लेकिन इस बार उल्टा देखने को मिला है। शेयर बाजारों के साथ-साथ कीमती धातुओं में भी भारी गिरावट आई है, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है।
चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट
सबसे ज्यादा असर चांदी पर देखने को मिला है। युद्ध शुरू होने के बाद से चांदी के दाम तेजी से टूटे हैं। 27 फरवरी को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी Multi Commodity Exchange of India पर चांदी का भाव लगभग ₹2,82,644 प्रति किलो था।
लेकिन अब यह गिरकर करीब ₹2,32,600 प्रति किलो तक आ गया है। यानी करीब 37 दिनों में चांदी लगभग ₹50,000 प्रति किलो तक सस्ती हो चुकी है। इतना ही नहीं, अपने हाई लेवल से देखें तो चांदी ₹2 लाख से ज्यादा नीचे आ चुकी है, जो एक बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
सोना भी हुआ कमजोर
चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी तेज गिरावट आई है। युद्ध शुरू होने से पहले 24 कैरेट सोने का भाव लगभग ₹1,65,659 प्रति 10 ग्राम था। अब यह घटकर करीब ₹1,49,650 प्रति 10 ग्राम तक आ गया है।
इस हिसाब से सोना करीब ₹16,000 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है। अगर इसके ऑल टाइम हाई पर नजर डालें, तो सोना और भी ज्यादा गिरा हुआ दिखता है। पहले यह ₹2,02,984 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच चुका था, लेकिन अब इससे करीब ₹53,000 कम पर मिल रहा है।
आखिर क्यों गिरे सोना-चांदी के दाम?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि युद्ध जैसे माहौल में भी सोना-चांदी क्यों गिर रहे हैं। इसके पीछे कई अहम कारण हैं।
सबसे पहले, होर्मुज क्षेत्र में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। तेल महंगा होने से वैश्विक महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
दूसरा कारण यह है कि निवेशक इस समय कैश यानी नकद को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। अनिश्चितता के माहौल में लोग पैसा हाथ में रखना पसंद कर रहे हैं।
तीसरा बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। युद्ध के दौरान डॉलर लगातार मजबूत हुआ है और 100 के स्तर से ऊपर बना हुआ है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना-चांदी जैसी धातुओं की कीमतों पर दबाव पड़ता है।
निवेशकों का बदला रुख
इस समय ग्लोबल निवेशक तेजी से अपना रुख बदल रहे हैं। पहले जहां सोना सुरक्षित विकल्प माना जाता था, वहीं अब लोग डॉलर और नकद की तरफ ज्यादा झुक रहे हैं। यही वजह है कि जियो-पॉलिटिकल तनाव के बावजूद सोना-चांदी में तेजी नहीं आ पा रही है और इनके दाम लगातार नीचे जा रहे हैं।
