ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर होने के बावजूद इजरायल ने अपनी सैन्य कार्रवाई पूरी तरह नहीं रोकी है। खबरों के मुताबिक, इजरायल लगातार दक्षिणी लेबनान में एयरस्ट्राइक कर रहा है। इससे साफ है कि क्षेत्र में तनाव अभी भी कम नहीं हुआ है और हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।
‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ का बड़ा खुलासा
इजरायली सेना यानी IDF ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें 40 दिनों तक चले सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ की पूरी जानकारी दी गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान के दौरान ईरान के खिलाफ करीब 18,000 बम गिराए गए।
IDF का दावा है कि इस दौरान ईरान के 4,000 से ज्यादा अलग-अलग ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह आंकड़ा इस ऑपरेशन की व्यापकता और तीव्रता को दर्शाता है।
हजारों उड़ानें और सटीक हमले
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस पूरे अभियान के दौरान इजरायली वायु सेना ने 8,500 से ज्यादा उड़ानें भरीं। इनमें से 1,000 से अधिक मिशन सीधे ईरान की सीमा के अंदर जाकर पूरे किए गए।
इसके अलावा, कुल 10,800 से ज्यादा स्ट्राइक पॉइंट्स पर हमले किए गए। इनमें से लगभग 6,700 टारगेट ईरान के सैन्य ढांचे से जुड़े अहम हिस्से थे, जैसे मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स, रक्षा सिस्टम और अन्य रणनीतिक ठिकाने।
ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर
इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्तों का सीजफायर तय किया गया है। यह समझौता बुधवार को हुआ, जिससे उम्मीद की जा रही है कि तनाव कुछ कम होगा।
साथ ही, शनिवार से पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता शुरू होने की संभावना है। ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका ने उसकी 10 शर्तें मान ली हैं, जिसके चलते वह इस संघर्ष को अपनी जीत मान रहा है।
इजरायल का अलग नजरिया
हालांकि, इजरायल इस सीजफायर को लेकर ज्यादा आश्वस्त नहीं है। इजरायली अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ एक अस्थायी कदम है, जिससे दोनों पक्षों को अपनी ताकत फिर से जुटाने का समय मिल रहा है।
इजरायल का दावा है कि उसके हमलों से ईरान की सैन्य क्षमताओं, मिसाइल निर्माण और रक्षा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। यही वजह है कि वह अपनी रणनीति में बदलाव नहीं कर रहा।
उत्तर में भी जारी है खतरा
इजरायल ने साफ किया है कि वह उत्तर में सक्रिय हिजबुल्लाह से मिलने वाली चुनौतियों को लेकर भी सतर्क है। सेना का कहना है कि वह इन खतरों के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगा।
