अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कई घंटों तक चली, लेकिन आखिरकार कोई समझौता नहीं हो पाया। दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल नीति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर नियंत्रण को लेकर था।
अमेरिका चाहता था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा छोड़ दे, जबकि ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा रहा और उसने अमेरिकी प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। इस इलाके में तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो जाती है।
ईरान ने इस रास्ते को सीमित कर दिया, जिससे जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई और वैश्विक बाजार में डर फैल गया।
तेल की कीमतों में उछाल
तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
- कुछ समय पहले तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया
- युद्ध और सप्लाई रुकने से कीमतें और बढ़ने का खतरा बना हुआ है
ऊर्जा संकट के कारण दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा भी जताया जा रहा है।
शेयर बाजार पर असर
जब भी युद्ध या तनाव बढ़ता है, निवेशक घबराने लगते हैं। इसी वजह से:
- बाजार में अनिश्चितता बढ़ी
- निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर भागते हैं
- तेल महंगा होने से कंपनियों की लागत बढ़ती है
हालांकि, जब कुछ समय के लिए सीजफायर की खबर आई थी, तब शेयर बाजार में तेजी देखी गई थी।
ट्रंप क्या कर सकते हैं?
डोनाल्ड ट्रंप के पास अब कई विकल्प हैं:
- सैन्य कार्रवाई बढ़ाना – अमेरिका पहले ही होर्मुज़ में जहाज भेजकर रास्ता साफ करने की कोशिश कर रहा है
- नई बातचीत शुरू करना – कूटनीतिक समाधान खोजने की कोशिश
- आर्थिक दबाव बढ़ाना – ईरान पर और प्रतिबंध लगाना
लेकिन हर विकल्प में जोखिम है, क्योंकि इससे युद्ध और बढ़ सकता है।
दुनिया पर असर
इस पूरे विवाद का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है।
- कई देशों की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित
- पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा
- खाद्य पदार्थों की कीमत भी बढ़ सकती है
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट 1970 के बाद सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बन सकता है।
