पंजाब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ ‘किसानी‘ को मजबूत करने के लिए पंजाब सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य न केवल फसल की पैदावार बढ़ाना है, बल्कि किसानों की आय को सुरक्षित कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। आज पंजाब देश का ऐसा राज्य बन गया है जहाँ किसानों को फसल नुकसान पर सबसे अधिक राहत राशि और गन्ने का रिकॉर्ड मूल्य दिया जा रहा है।
किसानों के लिए देश का सबसे बड़ा मुआवजा मॉडल
प्राकृतिक आपदाओं या अन्य कारणों से होने वाले फसल नुकसान की भरपाई के लिए पंजाब सरकार ने देश का सबसे बड़ा सहायता पैकेज लागू किया है:
* ₹20,000 प्रति एकड़ मुआवजा: फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को मिलने वाली ₹20,000 प्रति एकड़ की राहत राशि पूरे भारत में सर्वाधिक है। यह सुनिश्चित करता है कि संकट के समय में किसान अकेला न महसूस करे।
* पारदर्शी आकलन: नुकसान का सटीक और पारदर्शी गिरदावरी (आकलन) कर सीधे बैंक खातों में सहायता राशि पहुँचाई जा रही है।
सिंचाई और गन्ने की खेती को नया प्रोत्साहन
पंजाब सरकार ने पारंपरिक खेती से लेकर कैश क्रॉप (नकदी फसलों) तक हर स्तर पर सुधार किए हैं:
* नहरी पानी का विस्तार: राज्य के इतिहास में पहली बार ‘नहरी खालों‘ का पुनरुद्धार कर हर खेत के आखिरी छोर तक पानी पहुँचाया गया है। इससे नलकूपों पर निर्भरता कम हुई है और कीमती भूजल की बचत हो रही है।
* गन्ने का रिकॉर्ड भाव: पंजाब के गन्ना किसानों को अब ₹416 प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। यह कदम गन्ने की खेती को लाभकारी बनाने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।
आधुनिक तकनीक और त्वरित भुगतान प्रणाली
किसानों को मंडियों में होने वाली दिक्कतों से बचाने और खेती को आधुनिक बनाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है:
* सब्सिडी पर सीआरएम मशीनें: पराली प्रबंधन और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए किसानों को सब्सिडी पर क्रॉप रेसिड्यू मैनेजमेंट मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं।
* 24 घंटों में भुगतान: फसलों की तुरंत खरीद सुनिश्चित की गई है। किसानों को उनकी फसल का दाम 24 घंटों के भीतर उनके बैंक खातों में मिल रहा है, जिससे उन्हें अगली फसल की तैयारी में वित्तीय परेशानी नहीं होती।
पंजाब सरकार की ये नीतियां दर्शाती हैं कि “अन्नदाता” की खुशहाली ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ₹20,000 का मुआवजा, ₹416 का गन्ना भाव और सुदृढ़ सिंचाई नेटवर्क पंजाब को एक बार फिर देश का असली ‘अन्न भंडार‘ बनाने की दिशा में ठोस कदम हैं।
