पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभाली थी, तब हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे और सरकारी खजाने की स्थिति काफी कमजोर थी। अब वित्तीय अनुशासन और आर्थिक सुधारों की दिशा में किए गए प्रयासों के सकारात्मक संकेत दिखाई देने लगे हैं।
‘खजाना खाली था’ से सुधार की ओर सफर
हरपाल चीमा ने एक ट्वीट में कहा कि जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें वित्त विभाग की जिम्मेदारी सौंपी थी, तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य की वित्तीय स्थिति को संभालना था। उन्होंने बताया कि सरकार का पहला लक्ष्य वित्तीय अनुशासन बहाल करना और पंजाब की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना था।
वित्तीय अनुशासन पर दिया गया जोर
वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने खर्चों पर नियंत्रण, राजस्व बढ़ाने और आर्थिक प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया है। उनके अनुसार, अब कुछ महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जो राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार का संकेत देते हैं।
आर्थिक क्षमता को लेकर बड़ी उम्मीदें
चीमा ने कहा कि हालात में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन अभी मंजिल दूर है। उनके अनुसार, पंजाब के पास आर्थिक विकास की बड़ी संभावनाएं हैं और राज्य की पूरी क्षमता को हासिल करने के लिए अभी कई महत्वपूर्ण कदम उठाने बाकी हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार आने वाले समय में आर्थिक सुधारों और विकास परियोजनाओं पर और अधिक ध्यान देगी।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व का किया जिक्र
वित्त मंत्री ने अपने बयान में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाना और विकास कार्यों को गति देना है। इसी दिशा में विभिन्न विभागों के साथ मिलकर आर्थिक ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आगे की चुनौतियों पर भी नजर
हरपाल चीमा ने स्पष्ट किया कि आर्थिक सुधार एक लंबी प्रक्रिया है और इसे लगातार आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने, निवेश बढ़ाने और विकास की रफ्तार तेज करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।
