रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लंबे समय से अपनी फिटनेस और मजबूत छवि को लेकर चर्चा में रहे हैं। कभी घुड़सवारी करते हुए, कभी आइस हॉकी खेलते हुए और कभी एडवेंचर गतिविधियों में दिखाई देने वाले पुतिन अब एक और वजह से सुर्खियों में हैं। नई रिपोर्टों के अनुसार, रूस मानव जीवन को लंबा करने और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए एक बड़े वैज्ञानिक मिशन पर काम कर रहा है।
26 अरब डॉलर का बड़ा प्रोजेक्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने “न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज” नाम का एक विशाल राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 26 अरब डॉलर बताई जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य ऐसी तकनीकों को विकसित करना है जो इंसानों की उम्र बढ़ाने, अंगों को बदलने और शरीर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत में मदद कर सकें।
पुतिन और शी जिनपिंग की चर्चा ने खींचा ध्यान
इस परियोजना को लेकर दुनिया का ध्यान तब और बढ़ गया जब चीन में एक कार्यक्रम के दौरान पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मानव अंगों के प्रत्यारोपण और लंबे जीवन को लेकर बातचीत की खबरें सामने आईं। बताया गया कि दोनों नेताओं ने भविष्य में इंसानी उम्र बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की थी।
3D प्रिंटिंग से बनाए जा रहे जीवित अंग
रूस जिन तकनीकों पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रहा है, उनमें बायोप्रिंटिंग प्रमुख है। इस तकनीक में 3डी प्रिंटर की मदद से जीवित ऊतक और अंग तैयार किए जाते हैं। रूसी वैज्ञानिकों का दावा है कि वे मानव कार्टिलेज और चूहे की थायरॉयड ग्रंथि जैसी संरचनाएं तैयार करने में सफलता हासिल कर चुके हैं। लक्ष्य यह है कि आने वाले वर्षों में मानव अंगों का प्रयोगशाला में निर्माण संभव हो सके।
मिनी-पिग्स के अंदर उगाए जाएंगे मानव अंग
इस परियोजना का दूसरा बड़ा हिस्सा जीन संशोधित मिनी-पिग्स से जुड़ा है। वैज्ञानिक ऐसे सूअरों के अंदर मानव अंग विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिन्हें भविष्य में जरूरत पड़ने पर ट्रांसप्लांट किया जा सके। विशेषज्ञ इसे चिकित्सा विज्ञान की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक मान रहे हैं।
2030 तक बड़ा लक्ष्य
रूसी सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक अंग प्रत्यारोपण और जीवन विस्तार से जुड़ी कई तकनीकों को व्यावहारिक रूप देना है। इसके अलावा कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए जीन थेरेपी पर भी काम चल रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भविष्य में कई गंभीर बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
पुतिन की बेटी भी निभा रही अहम भूमिका
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की निगरानी करने वालों में पुतिन की बेटी मारिया वोरोंतसोवा का नाम भी शामिल है। वह चिकित्सा और आनुवंशिक अनुसंधान से जुड़े सरकारी कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनके साथ रूसी वैज्ञानिक मिखाइल कोवालचुक भी इस परियोजना के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।
वैज्ञानिक दुनिया में उठ रहे सवाल
हालांकि रूस के इन दावों को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में बहस भी जारी है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इन परियोजनाओं से जुड़ा शोध अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक पत्रिकाओं में बहुत कम दिखाई देता है। इसी वजह से कई लोग इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं। फिर भी रूस इस क्षेत्र में खुद को दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल करने की कोशिश कर रहा है।
