भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर के शेयरों पर लगातार दबाव बना हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव को लेकर निवेशकों की चिंताओं के कारण प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। साल 2026 के दौरान कई बड़ी आईटी कंपनियों के शेयर 35 प्रतिशत तक टूट चुके हैं, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
निफ्टी आईटी इंडेक्स में तेज गिरावट
गुरुवार के कारोबार में निफ्टी आईटी इंडेक्स 2 प्रतिशत से अधिक गिर गया। सुबह के कारोबार में यह करीब 2.4 प्रतिशत टूटकर 27,595 के स्तर पर पहुंच गया। इसके मुकाबले निफ्टी 50 में अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज की गई। आईटी सेक्टर का यह प्रदर्शन बाजार के अन्य प्रमुख सेक्टरों की तुलना में काफी कमजोर रहा।
दिग्गज कंपनियों के शेयर टूटे
आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। एचसीएल टेक के शेयरों में सबसे अधिक लगभग 3.5 प्रतिशत की गिरावट आई। इंफोसिस करीब 2.5 प्रतिशत टूटा, जबकि टेक महिंद्रा, विप्रो और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयरों में 1.4 से 2 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई। लगातार गिरावट के चलते निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ है।
AI को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग से आईटी सेवा कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल पर असर पड़ सकता है। कई निवेशकों को डर है कि ऑटोमेशन और AI के कारण कंपनियों की कमाई और विकास दर प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से आईटी सेक्टर को लेकर बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
अमेरिकी बाजार का भी असर
भारतीय आईटी शेयरों की कमजोरी के पीछे अमेरिकी टेक शेयरों में आई गिरावट को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। नैस्डैक और अन्य तकनीकी शेयरों में कमजोरी के चलते भारतीय निवेशकों की धारणा भी प्रभावित हुई है। AI सेक्टर में ऊंचे वैल्यूएशन और संभावित बबल की आशंकाओं ने भी दबाव बढ़ाया है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि आने वाले कुछ तिमाहियों तक आईटी सेक्टर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। कुछ विशेषज्ञ मौजूदा तेजी में मुनाफावसूली की सलाह दे रहे हैं, जबकि कई विश्लेषकों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य रखना चाहिए। उनका कहना है कि अगले 6 से 7 महीनों में सेक्टर की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है और तभी बेहतर निवेश अवसर सामने आ सकते हैं।
