अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव में बड़ी राहत देखने को मिली है। दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक शांति समझौता होने की खबर सामने आने के बाद दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। इसका सबसे बड़ा असर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों, शेयर बाजार और भारतीय रुपये पर दिखाई दिया।
आखिर क्यों गिरा कच्चे तेल का भाव?
पिछले कुछ महीनों से ईरान संघर्ष के कारण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), प्रभावित था। इस रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की आपूर्ति होती है। बाजार को डर था कि सप्लाई बाधित होने से तेल की कीमतें लगातार बढ़ सकती हैं।
लेकिन अब अमेरिका-ईरान समझौते के बाद उम्मीद बढ़ गई है कि यह मार्ग फिर से सामान्य हो जाएगा। इसी उम्मीद में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 4 से 5 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई और तेल तीन महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया।
शेयर बाजार में क्यों आई तेजी?
जब तेल की कीमतें कम होती हैं तो तेल आयात करने वाले देशों को बड़ा फायदा मिलता है। भारत भी अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसलिए सस्ता तेल भारतीय कंपनियों की लागत कम कर सकता है और अर्थव्यवस्था पर दबाव घटा सकता है।
यही वजह रही कि निवेशकों ने शेयर बाजार में खरीदारी शुरू कर दी। भारत सहित दुनिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखने को मिली। अमेरिका के प्रमुख सूचकांक रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंच गए, जबकि एशियाई बाजारों में भी शानदार उछाल दर्ज हुआ।
रुपये को मिला बड़ा सहारा
कच्चा तेल सस्ता होने का सीधा फायदा भारतीय रुपये को भी मिला। जब भारत कम कीमत पर तेल खरीदता है तो डॉलर की मांग घटती है, जिससे रुपये को मजबूती मिलती है।
रिपोर्टों के अनुसार, रुपये में लगभग 40 पैसे तक की मजबूती देखी गई और यह कई सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और शांति प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो रुपये को आने वाले महीनों में और समर्थन मिल सकता है।
आम लोगों पर क्या पड़ सकता है असर?
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ता बना रहता है तो भारत में पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत पर दबाव कम हो सकता है। इससे महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही कंपनियों की लागत घटने से उनके मुनाफे में सुधार की संभावना बढ़ जाती है।
हालांकि विशेषज्ञ अभी भी सतर्क हैं क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की कई शर्तों पर अंतिम मुहर लगना बाकी है। फिर भी फिलहाल बाजार इस खबर को सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है और निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
