पंजाब इस समय भीषण गर्मी और लगातार बढ़ती हीटवेव की स्थिति से जूझ रहा है, जहां कई इलाकों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। इस स्थिति में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 के पहले तीन हफ्तों में राज्य की बिजली खपत पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6% बढ़कर करीब 4,574 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है, जबकि कुछ दिनों में पीक डिमांड 14,000 मेगावाट से भी ऊपर दर्ज की गई है। इसी बढ़ती मांग ने राज्य की पावर मैनेजमेंट प्रणाली पर बड़ा दबाव डाल दिया है।
हीटवेव के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि एक ओर घरेलू और कृषि क्षेत्र में कूलिंग उपकरणों का उपयोग बढ़ा, तो दूसरी ओर कृषि सीजन और सिंचाई की जरूरतों ने भी बिजली खपत को तेज कर दिया। पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को कई बार सप्लाई और डिमांड के बीच अंतर का सामना करना पड़ा, जिससे कुछ क्षेत्रों में नियंत्रित बिजली कटौती करनी पड़ी।
इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार और पावर विभाग ने कई अहम कदम उठाए हैं। सबसे पहले, पीक डिमांड मैनेजमेंट पर फोकस किया गया है। गर्मी के चरम समय यानी दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच लोड को नियंत्रित करने के लिए शेड्यूलिंग और सप्लाई मैनेजमेंट को मजबूत किया गया है। कई इलाकों में आवश्यकतानुसार केवल 4 घंटे तक की ही नियोजित बिजली कटौती हुई है, ताकि सिस्टम पूरी तरह से ओवरलोड न हो।
दूसरा बड़ा कदम सप्लाई नेटवर्क को स्थिर बनाए रखना है। ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में मेंटेनेंस कार्यों को गर्मी के पीक सीजन से पहले या कम लोड वाले समय में शिफ्ट किया गया है। इससे अचानक फॉल्ट और ट्रिपिंग की घटनाओं को कम करने का प्रयास किया गया है।
तीसरा महत्वपूर्ण पहलू बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदना है। पंजाब में उपलब्ध उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग करना ताकि आवश्यक समय पर सप्लाई बाधित न हो।
इसके अलावा, “डिमांड साइड मैनेजमेंट” पर भी ज़ोर दिया गया है, जिसमें आम जनता से अपील की गई है कि वे अनावश्यक बिजली उपयोग से बचें, खासकर एयर कंडीशनर और कूलर के उपयोग में संयम रखें। उद्योगों और बड़े उपभोक्ताओं के लिए भी टाइम-शिफ्टेड लोड पैटर्न अपनाने को कहा गया है।
सरकार ने हीटवेव को देखते हुए अन्य विभागों के साथ भी समन्वय बढ़ाया है, ताकि बिजली, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाओं में तालमेल बना रहे। स्वास्थ्य विभाग ने हीट स्ट्रोक के मामलों के लिए अलग यूनिट्स सक्रिय किए हैं, जिससे अस्पतालों पर भी अतिरिक्त बोझ न पड़े।
कुल मिलाकर, पंजाब की पावर मैनेजमेंट रणनीति इस समय तीन स्तंभों पर आधारित है—सप्लाई बढ़ाना, डिमांड कंट्रोल करना और नेटवर्क को स्थिर रखना। हालांकि लगातार बढ़ती गर्मी और रिकॉर्ड बिजली मांग सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बनी हुई है, लेकिन मौजूदा कदमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को न्यूनतम व्यवधान के साथ बिजली आपूर्ति मिलती रहे और राज्य की अर्थव्यवस्था पर असर न पड़े।
