पंजाब सरकार ने अपने नए “जनता के लिए बजट” को विकास और वित्तीय अनुशासन का संतुलित दस्तावेज बताया है, लेकिन असली सवाल यह है कि यह बजट जनता के लिए कितना “वास्तविक लाभ” लेकर आता है। सरकार के वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 का कुल बजट लगभग ₹2.60 लाख करोड़ रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 3% अधिक है। इसमें से लगभग ₹1.66 लाख करोड़ (लगभग 64%) सीधे विकास कार्यों और गैर-ऋण खर्चों पर खर्च किए जाएंगे।
सरकार का दावा है कि इस बार कर्ज प्रबंधन में सुधार हुआ है। वित्तीय वर्ष में राज्य ने ₹5,300 करोड़ का नया कर्ज लिया, जबकि इसी अवधि में ₹5,845 करोड़ पुराने कर्ज के भुगतान में लगाए गए, यानी सरकार का कहना है कि “उधारी से ज्यादा पुराना कर्ज चुकाया गया”। इसके बावजूद कुल सार्वजनिक ऋण अभी भी लगभग ₹4.4–4.5 लाख करोड़ के आसपास पहुंचने का अनुमान है, जो राज्य की वित्तीय स्थिति की चुनौती को दिखाता है।
अब बात “जनता का बजट” होने के दावे की। सरकार के अनुसार, इस बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लगभग ₹18,000 करोड़ से अधिक का पूंजीगत व्यय रखा गया है, जो पिछले वर्ष से लगभग 70% ज्यादा है। इसमें सड़क, पुल, ग्रामीण संपर्क मार्ग, शहरी विकास और जल निकासी योजनाओं पर ज़ोर दिया गया है। इसका सीधा उद्देश्य रोजगार और स्थानीय विकास को बढ़ावा देना बताया गया है।
वेलफेयर सेक्टर में भी बड़ा हिस्सा रखा गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये का आवंटन जारी है। इसके अलावा महिलाओं के लिए मासिक वित्तीय सहायता योजना जैसी नई घोषणाएं भी शामिल हैं, जिसे सरकार “सीधे लाभ देने वाली नीति” बता रही है। बुजुर्ग पेंशन, छात्रवृत्ति और गरीब परिवारों की सहायता योजनाओं को भी जारी रखा गया है।
कुल मिलाकर, सरकार के आंकड़ों में यह बजट “जनता का बजट” दिखता है—जहां कर्ज प्रबंधन, बढ़ा हुआ विकास खर्च और नई वेलफेयर योजनाएं प्रमुख हैं।
