देश में पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने के लिए सरकार एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रही है। इसी के तहत अब कई पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल उपलब्ध है। E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। हालांकि, अप्रैल 2023 से पहले बनी कई कारें और बाइक इस ईंधन के लिए पूरी तरह तैयार नहीं मानी जाती हैं।
पुरानी गाड़ियों को क्यों है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक एथेनॉल वाले ईंधन के उपयोग से पुरानी गाड़ियों में माइलेज कम हो सकता है। इसके अलावा इंजन के कुछ हिस्सों में जंग लगने, रबर के पार्ट्स खराब होने और फ्यूल सिस्टम में दिक्कत आने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए वाहन मालिकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
फ्यूल सिस्टम क्लीनर का करें इस्तेमाल
पुरानी कारों के लिए फ्यूल सिस्टम क्लीनर एक उपयोगी विकल्प माना जाता है। इसे पेट्रोल के साथ मिलाने से फ्यूल लाइनों और इंजन में जमा गंदगी तथा नमी को कम करने में मदद मिलती है। बाजार में यह उत्पाद कम कीमत में उपलब्ध है और इंजन की सुरक्षा में सहायक हो सकता है।
रबर पार्ट्स को कराएं अपग्रेड
एथेनॉल रबर और कुछ प्लास्टिक पार्ट्स को जल्दी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए पुरानी गाड़ियों में लगे रबर सील्स, फ्यूल पाइप और गैस्केट की जांच करानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर इन्हें एथेनॉल-कम्पैटिबल सामग्री से बदलवाना बेहतर माना जाता है।
समय पर बदलें फ्यूल फिल्टर
E20 पेट्रोल पुराने टैंक में जमा गंदगी और जंग को बाहर निकाल सकता है, जिससे फ्यूल फिल्टर जल्दी जाम हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फ्यूल फिल्टर को नियमित अंतराल पर बदलवाते रहें। इससे इंजन तक ईंधन की सही आपूर्ति बनी रहती है और वाहन की परफॉर्मेंस प्रभावित नहीं होती।
लंबे समय तक खड़ी न रखें कार
यदि गाड़ी लंबे समय तक खड़ी रहती है तो एथेनॉल हवा से नमी सोख सकता है। इससे फ्यूल टैंक और इंजन के हिस्सों में जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है। वाहन को समय-समय पर चलाते रहना और जरूरत के अनुसार ही पेट्रोल भरवाना इंजन की बेहतर सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है।
