भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद हरे निशान में कारोबार समाप्त किया। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 130.49 अंक यानी 0.17% की बढ़त के साथ 77,185.43 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 24,050 के स्तर के ऊपर बंद होने में सफल रहा। कारोबार के दौरान बाजार ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन बाद में मुनाफावसूली के कारण शुरुआती बढ़त का बड़ा हिस्सा कम हो गया।
शुरुआत में दिखी जोरदार तेजी
कारोबार की शुरुआत में निवेशकों का रुख काफी सकारात्मक दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक चढ़ गया था और निफ्टी भी 24,150 के ऊपर पहुंच गया। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूत आधार दिया। हालांकि दोपहर बाद बिकवाली बढ़ने से बाजार अपनी ऊंचाई पर टिक नहीं सका और अंत में सीमित बढ़त के साथ बंद हुआ।
बाजार में शुरुआती तेजी के पीछे कई सकारात्मक संकेत रहे। एशियाई बाजारों में मजबूती, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों के नरम रहने से ब्याज दरों में राहत की उम्मीद, रुपये की मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर कुछ भू-राजनीतिक चिंताओं में नरमी आने से भी बाजार को शुरुआती समर्थन मिला।
वैश्विक तनाव ने सीमित की बढ़त
हालांकि दिन चढ़ने के साथ निवेशकों का रुख सतर्क होता गया। पश्चिम एशिया से जुड़ी भू-राजनीतिक चिंताओं और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण कई निवेशकों ने मुनाफावसूली करना बेहतर समझा। इसी वजह से सुबह की तेज बढ़त धीरे-धीरे कम होती गई और बाजार केवल हल्के लाभ के साथ बंद हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम भारतीय बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
बैंकिंग शेयरों ने संभाला बाजार
बुधवार के कारोबार में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयर बाजार की मजबूती का प्रमुख आधार बने। बड़े बैंकिंग शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों को सहारा मिला। दूसरी ओर धातु (मेटल) क्षेत्र के कुछ शेयरों में कमजोरी देखने को मिली, जिससे बाजार की कुल बढ़त सीमित रही।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यदि सकारात्मक संकेत जारी रहते हैं तो बाजार में खरीदारी का माहौल बना रह सकता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से जुड़ी कोई भी नई खबर बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकती है।
