पंजाब में निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर सरकार ने सख्ती की तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि शिक्षा कोई मुनाफा कमाने वाला कारोबार नहीं, बल्कि समाज की भलाई से जुड़ा क्षेत्र है। सरकार की ओर से निजी स्कूलों की फीस में हर साल होने वाली बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए बिल लाया गया है।
हर साल फीस बढ़ाने पर सीमा तय
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत निजी स्कूल अब एक साल में फीस में 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा पिछले तीन वर्षों में 15 प्रतिशत से अधिक वसूली गई फीस को वापस करने का प्रावधान भी बताया गया है। इस फैसले से पंजाब के करीब 7,800 स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 32 लाख विद्यार्थियों के परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम करने की कोशिश
निजी स्कूलों की फीस में लगातार बढ़ोतरी लंबे समय से अभिभावकों के लिए चिंता का विषय रही है। सरकार का कहना है कि नए नियमों का मकसद स्कूलों की फीस व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और माता-पिता पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करना है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा की अहमियत पर दिया जोर
भगवंत मान ने शिक्षा को ऐसी संपत्ति बताया जिसे कोई व्यक्ति छीन नहीं सकता। उनका कहना है कि पैसा या जमीन खो सकती है, लेकिन शिक्षा इंसान के साथ जीवनभर रहती है। मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों में किए जा रहे सुधारों का भी जिक्र करते हुए कहा कि स्कूलों की सुविधाओं और ढांचे को बेहतर बनाने पर सरकार लगातार काम कर रही है।
निजी स्कूलों से सहयोग की अपील
मुख्यमंत्री ने निजी स्कूलों से भी बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को प्राथमिकता देने की अपील की है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार चाहती है कि निजी शिक्षण संस्थान केवल आर्थिक लाभ पर ध्यान देने के बजाय विद्यार्थियों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए अपनी भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों के लिए अभिभावकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया है।
