मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार बच्चों के संरक्षण और कानूनी दत्तक ग्रहण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और बाल-केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी कड़ी में सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी पंजाब द्वारा ‘एडॉप्शन रेगुलेशंस, 2022’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि राज्य का कोई भी बच्चा परिवार के स्नेह, सुरक्षा और देखभाल से वंचित न रहे। सरकार बच्चों के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करते हुए दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और कानूनी रूप से मजबूत बना रही है।
डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि पंजाब देश का पहला राज्य बन गया है, जहां प्रत्येक जिले में स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी स्थापित की गई है। वर्तमान में राज्य में कुल 26 स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियां कार्यरत हैं, जिनमें 16 सरकारी और 10 गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा संचालित की जा रही हैं। यह व्यवस्था जरूरतमंद बच्चों को शीघ्र और सुरक्षित पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 87 अनाथ, परित्यक्त और सरेंडर किए गए बच्चों को कानूनी रूप से गोद दिलाया गया। इनमें 66 बच्चों को देश के भीतर परिवार मिले, जबकि 21 बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दत्तक ग्रहण किया गया। इसके अलावा 10 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को भी परिवार का स्नेह और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया गया। वहीं रिश्तेदारों और सौतेले माता-पिता (स्टेप-पेरेंट्स) के माध्यम से 47 बच्चों को कानूनी रूप से गोद लिया गया। इस प्रकार कुल 134 बच्चों को स्थायी पारिवारिक सुरक्षा और बेहतर भविष्य मिला।
उन्होंने कहा कि दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बाल कल्याण समितियां, जिला बाल संरक्षण इकाइयां तथा स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है, ताकि प्रत्येक मामले का समयबद्ध और कानूनी रूप से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के सभी जिलों से उपायुक्तों के प्रतिनिधि, सिविल सर्जनों, बाल कल्याण समितियों, जिला बाल संरक्षण इकाइयों तथा स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों के अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी के प्रतिनिधि सयम बिन खालिद ने एडॉप्शन रेगुलेशंस-2022, CARINGS पोर्टल, दस्तावेजीकरण, समयबद्ध प्रक्रिया और विभिन्न हितधारकों की जिम्मेदारियों पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं पीजीआई की प्रोफेसर डॉ. भवनीत भारती ने बच्चों की चिकित्सीय जांच, स्वास्थ्य मूल्यांकन तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के मेडिकल रिकॉर्ड के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर भी विचार-विमर्श किया। सरकार का उद्देश्य सभी संबंधित अधिकारियों को नवीनतम नियमों और प्रक्रियाओं से प्रशिक्षित कर यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे को सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और स्थायी परिवार समय पर मिल सके।
