नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आई भीषण बाढ़ और मलबे की तबाही के तीन दिन बाद भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। पहाड़ों से आए पानी, बर्फ, चट्टानों और मलबे ने कई इलाकों में भारी नुकसान किया है। नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से ज्यादा देशों के नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। करीब 1600 लोगों को हेलीकॉप्टर और जमीन के रास्ते सुरक्षित निकाला जा चुका है।
सड़कें और पुल तबाह, राहत पहुंचाना मुश्किल
बाढ़ की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई सड़कें और पुल इसकी चपेट में आ गए। नेपाल में 35 बड़े पुल, 45 झूला पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। बिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। इसी वजह से कई प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने का काम जारी है।
भारत के 288 नागरिकों से संपर्क नहीं
इस त्रासदी में भारत के भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार 288 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें 73 लोग एक पनबिजली परियोजना में काम कर रहे थे, जबकि कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी है। भारत ने नेपाल के लिए 47.5 टन राहत सामग्री भी भेजी है, जिसमें दवाइयां और भोजन शामिल हैं।
अमेरिका समेत कई देशों के लोग लापता
नेपाल और तिब्बत में लापता लोगों में अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया और यूक्रेन समेत कई देशों के नागरिक शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार करीब 90 अमेरिकी नागरिकों का अभी पता नहीं चला है, हालांकि तीन अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी है। ब्रिटेन के करीब 33 नागरिक भी लापता बताए गए हैं।
ग्लेशियर और पहाड़ टूटने से आई तबाही
शुरुआत में इस घटना को भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण की जांच में सामने आया कि दर्ज हुई हलचल असल में ग्लेशियर और पहाड़ की चट्टानों के अचानक टूटने से पैदा हुई थी। भारी मात्रा में बर्फ, पत्थर और मलबा नदी में जा गिरा। इसके बाद पानी और मलबे का तेज बहाव कई इलाकों में फैल गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी, हालांकि गर्म होते मौसम से पहाड़ी इलाकों में बर्फ और जमीन की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
नई झील ने बढ़ाई चिंता
बाढ़ के बाद मलबा जमा होने से नदी के ऊपरी हिस्से में एक नई झील बन गई है। चीनी अधिकारियों के अनुसार इसमें पहले ही करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और आने वाले दिनों में इसमें और पानी भरने की आशंका है। अगर प्राकृतिक बांध टूटता है तो नीचे के क्षेत्रों में अचानक एक और बाढ़ आ सकती है। इसी कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की चेतावनी दी गई है।
भारत ने बढ़ाई निगरानी
नेपाल की स्थिति को देखते हुए भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में प्रशासन गंडक नदी के जलस्तर पर नजर रख रहा है। उत्तराखंड में संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और श्रीलंका समेत कई देशों ने नेपाल के लिए राहत और सहायता का ऐलान किया है।
