चंडीगढ़, 5 अक्टूबर:
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की ओर से सभी के लिए सुरक्षित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज यहां म्युनिसिपल भवन में ‘राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस’ के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह के दौरान रक्तदाताओं, रक्तदान करने वाली संस्थाओं और ब्लड सेंटरों को सम्मानित किया।
इस समारोह के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्र सरकार के ‘ई-रक्तकोष’ पोर्टल पर प्रति दस लाख आबादी के पीछे स्वैच्छिक रक्तदान के मामले में देशभर में तीसरा स्थान हासिल करने तथा दोबारा रक्तदान करने वाले स्वैच्छिक रक्तदाताओं की संख्या में देश का नेतृत्व करने के लिए पंजाब की शानदार उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. बलबीर सिंह ने पंजाब स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की विशेष स्मारिका भी जारी की, जिसमें राज्य की प्रमुख उपलब्धियों, बेहतर कार्यप्रणालियों और रक्तदाताओं के योगदान को दर्शाया गया है।
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और रक्त संचरण सेवाओं में सुधार के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से जोरदार अपील की कि कॉलेज में पढ़ने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को वर्ष में कम से कम एक बार रक्तदान करने का संकल्प लेना चाहिए।
सक्रिय रक्तदाताओं को इस नेक कार्य के लिए ‘चैंपियन’ के रूप में आगे आने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आपने अपने निःस्वार्थ कार्यों के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धता साबित की है। अब समय आ गया है कि आप ‘स्टार डोनर्स’ से ‘स्टार मोटिवेटर्स’ बनें, ताकि अन्य लोगों, विशेषकर युवाओं को आगे आने और जीवन बचाने के लिए प्रेरित किया जा सके।’’
क्षेत्र में हेपेटाइटिस-सी के फैलाव पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि उचित स्क्रीनिंग, व्यापक ट्रैकिंग, समय पर उपचार और रक्त संबंधी सुरक्षा के कड़े नियमों के माध्यम से पंजाब में हेपेटाइटिस-सी की पॉजिटिविटी दर को राष्ट्रीय औसत से नीचे लाने के लिए ‘मिशन मोड’ में काम किया जाए।
उन्होंने दोहराया कि सरकार रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए उन्नत ‘न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग’ (एनएटी) और ‘केमिल्यूमिनेसेंस इम्यूनोऐसे’ (सीएलआईए) तकनीकों को लागू कर रही है, ताकि जांच से संबंधित ‘विंडो पीरियड’ को कम किया जा सके और एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी तथा हेपेटाइटिस-सी जैसी संक्रमणों के फैलाव को समाप्त किया जा सके।
राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि पंजाब ने रक्त संचरण के लिए मजबूत ढांचा तैयार किया है, जिसमें 198 लाइसेंस प्राप्त ब्लड सेंटर शामिल हैं। इनमें 49 सरकारी, 7 सैन्य तथा 142 निजी/ट्रस्ट द्वारा संचालित ब्लड सेंटर हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान राज्यभर में 6,583 रक्तदान शिविरों के माध्यम से कुल 5,44,167 यूनिट रक्त एकत्र किया गया। सरकारी ब्लड सेंटरों में एकत्र किए गए 1,78,382 यूनिट रक्त में से 1,77,583 यूनिट—लगभग 99.6 प्रतिशत—स्वैच्छिक रक्तदाताओं द्वारा दान किए गए थे।
रक्तदान को लेकर फैली गलत धारणाओं को खारिज करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, ‘‘रक्तदान करने से शरीर में किसी प्रकार की कमजोरी या कमी नहीं आती। अच्छी सेहत जीवन का वास्तविक खजाना है और नियमित रक्तदान न केवल हमें स्वस्थ एवं चुस्त-दुरुस्त रखता है, बल्कि कीमती जानें भी बचाता है। आइए, हम पंजाब में नियमित स्वैच्छिक रक्तदान को जन आंदोलन बनाएं।’’
राज्य स्तरीय सम्मान समारोह के दौरान कोटकपूरा के ‘पी.बी.जी. वेलफेयर क्लब’ ने सरकारी केंद्रों को रक्त की 8,933 यूनिट आपूर्ति करने के लिए स्वैच्छिक रक्तदान संस्थाओं में पहला स्थान हासिल किया। पुरुष रक्तदाताओं में बठिंडा के सुरिंदर पाल को 149 बार रक्तदान कर पंजाब में अग्रणी स्थान हासिल करने के लिए, जबकि महिलाओं में 69 बार रक्तदान करने वाली जालंधर की हरविंदर कौर को सम्मानित किया गया।
कुल मिलाकर 17 सेंचुरियन पुरुष रक्तदाताओं (100 से अधिक बार रक्तदान करने वाले), 18 महिला रक्तदाताओं (25 से अधिक बार रक्तदान करने वाली), चार विशेष रूप से दिव्यांग रक्तदाताओं, 12 सिंगल-डोनर प्लेटलेट (एसडीपी) एफेरेसिस रक्तदाताओं और छह स्वैच्छिक संगठनों को सम्मानित किया गया।
सेवानिवृत्त सिविल सर्जन डॉ. अजय बग्गा को स्वैच्छिक रक्त संचरण के क्षेत्र में उनकी सेवाओं के लिए प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
पटियाला और संगरूर को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिले घोषित किया गया। इसके साथ ही न्यूनतम डिस्कार्ड दर, सर्वाधिक कंपोनेंट सेपरेशन और थैलेसीमिया के मरीजों के लिए समर्पित रक्त आपूर्ति उपलब्ध कराने वाले ब्लड सेंटरों को भी सम्मानित किया गया। ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ तथा सरकारी मेडिकल कॉलेज, सेक्टर-32, चंडीगढ़ को भी उनकी उत्कृष्ट कार्यप्रणाली और अकादमिक प्रशिक्षण में सहयोग के लिए सम्मानित किया गया।
एचआईवी नियंत्रण में महत्वपूर्ण प्रगति का उल्लेख करते हुए मंत्री ने पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के एचआईवी 95-95-95 कैस्केड लक्ष्यों के तहत सराहनीय प्रदर्शन करने वाले जिलों को भी सम्मानित किया। पठानकोट को ‘सक्षम जिला’ के रूप में सम्मानित किया गया, जबकि फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब, अमृतसर, कपूरथला, एसएएस नगर (मोहाली) और बठिंडा को ‘सुरक्षित जिले’ का खिताब दिया गया। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि शीघ्र निदान, तेज एआरटी लिंकेज, मरीजों को उपचार से जोड़े रखने की उच्च दर और वायरल लोड को समाप्त करने की दिशा में निरंतर प्रयासों ने पंजाब में एड्स पर नियंत्रण पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख हस्तियों में स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव-कम-प्रोजेक्ट डायरेक्टर (पीएसएसीएस) एवं डायरेक्टर (पीएसबीटीसी) साक्षी साहनी, स्वास्थ्य सेवाओं की निदेशक डॉ. हितिंदर कौर, अतिरिक्त प्रोजेक्ट डायरेक्टर (पीएसएसीएस) डॉ. विशाल गर्ग, संयुक्त निदेशक (बीटीएस) डॉ. सुनीता देवी, संयुक्त निदेशक (बीएसडी) डॉ. सुखविंदर कौर, संयुक्त निदेशक (सीएसटी) डॉ. हरप्रीत कौर, संयुक्त निदेशक (प्रिवेंशन) डॉ. मीनू तथा संयुक्त निदेशक (आईईसी) पवन रेखा बेरी शामिल थीं।
