
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध फरवरी 2022 से जारी है। इस युद्ध को खत्म करवाने के लिए अमेरिका लगातार रूस पर दबाव बना रहा है। हाल ही में अमेरिका की सीनेट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों पार्टियों के 50 सीनेटरों ने रूस के खिलाफ एक सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव के अनुसार, अगर रूस शांति वार्ता से इनकार करता है या किसी समझौते को तोड़ता है, तो उसके तेल, गैस और यूरेनियम पर 500% तक टैरिफ यानी कर लगाया जा सकता है।
रूस को कमजोर करने की रणनीति
अमेरिका का मानना है कि रूस अब भी तेल और गैस की बिक्री से भारी आमदनी कर रहा है, जिससे वह युद्ध जारी रखने में सक्षम है। अमेरिका पहले भी रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगा चुका है, लेकिन इसका उतना असर नहीं पड़ा जितना उम्मीद थी। इसलिए अब अमेरिका ने एक और बड़ा कदम उठाने की योजना बनाई है, जिससे रूस की अर्थव्यवस्था को सीधा झटका लगे।
रूस की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा तेल, गैस और यूरेनियम की बिक्री पर निर्भर है। अगर अमेरिका इस पर 500% तक का भारी टैरिफ लगा देता है, तो रूस से इन चीजों को खरीदना बहुत महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर रूस की आमदनी पर पड़ेगा और उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है।
यूरोप पर भी पड़ेगा असर
रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस यूरोप के देश खरीदते हैं। अगर अमेरिका रूस पर इतना बड़ा टैरिफ लगा देता है, तो यूरोप को भी नए ऊर्जा स्रोतों की तलाश करनी होगी। यह यूरोप के लिए मुश्किल हो सकता है, क्योंकि वह पहले से ही रूस से तेल और गैस कम करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन रूस अभी भी कई देशों को ऊर्जा बेचकर अच्छा पैसा कमा रहा है।
अमेरिका चाहता है कि रूस के पास युद्ध जारी रखने के लिए पैसे की कमी हो जाए, ताकि वह मजबूर होकर शांति वार्ता के लिए तैयार हो जाए। अमेरिका का यह कदम यूक्रेन के लिए भी मददगार साबित हो सकता है, क्योंकि अगर रूस आर्थिक रूप से कमजोर होता है, तो उसके लिए युद्ध जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।
अमेरिका में दोनों पार्टियों का समर्थन
अमेरिका में आमतौर पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी कई मुद्दों पर अलग-अलग राय रखते हैं, लेकिन रूस के खिलाफ इस फैसले पर दोनों एक साथ हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अमेरिका रूस पर सख्त कार्रवाई करने के मूड में है।
इससे पहले, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने कार्यकाल में चीन सहित कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए थे, जिससे व्यापार युद्ध शुरू हो गया था। अब रूस के खिलाफ यह कदम भी अमेरिका की एक बड़ी आर्थिक और राजनीतिक चाल मानी जा रही है।
रूस के लिए आगे क्या?
अगर यह टैरिफ लागू होता है, तो रूस की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। अमेरिका का मकसद यही है कि रूस जल्द से जल्द शांति वार्ता के लिए तैयार हो जाए और युद्ध खत्म हो। हालांकि, यह देखना होगा कि रूस इस फैसले पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और अन्य देश इस स्थिति में क्या कदम उठाते हैं।
यह आर्थिक प्रतिबंध रूस और पूरी दुनिया के व्यापार पर असर डाल सकता है। अब सबकी नजर इस पर है कि यह टैरिफ कब लागू होता है और इसका रूस पर क्या प्रभाव पड़ता है।