भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह मजबूत तेजी देखने को मिली, लेकिन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का रुख अभी भी नकारात्मक बना हुआ है। बाजार में बढ़त के बावजूद विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। जून 2026 के पहले दो सप्ताह में ही एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से ₹62,853 करोड़ की निकासी कर दी है, जिससे निवेशकों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
2026 में रिकॉर्ड स्तर की बिकवाली
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के लिए जाना जा रहा है। जनवरी से अब तक एफपीआई भारतीय बाजार से कुल ₹2.87 लाख करोड़ निकाल चुके हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि में हुई ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से काफी अधिक है। लगातार बिकवाली से यह साफ संकेत मिल रहा है कि विदेशी निवेशक फिलहाल भारतीय बाजार को लेकर सतर्क बने हुए हैं।
फरवरी को छोड़ हर महीने हुई निकासी
इस साल केवल फरवरी ऐसा महीना रहा, जब विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में निवेश किया। फरवरी में एफपीआई ने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था। इसके अलावा बाकी सभी महीनों में उन्होंने बिकवाली की है।
2026 में एफपीआई की मासिक गतिविधियां
- जनवरी: ₹35,962 करोड़ की निकासी
- फरवरी: ₹22,615 करोड़ का निवेश
- मार्च: ₹1.17 लाख करोड़ की निकासी
- अप्रैल: ₹60,847 करोड़ की निकासी
- मई: ₹32,963 करोड़ की निकासी
- जून (पहले दो सप्ताह): ₹62,853 करोड़ की निकासी
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विदेशी निवेशकों का झुकाव लगातार बिकवाली की ओर रहा है।
आखिर क्यों बेच रहे हैं विदेशी निवेशक?
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। दुनिया के कई क्षेत्रों में जारी संघर्ष और अनिश्चितता के कारण निवेशक जोखिम कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके अलावा भारतीय शेयर बाजार का मूल्यांकन (Valuation) अन्य उभरते बाजारों की तुलना में अधिक माना जा रहा है। कई विदेशी निवेशकों का मानना है कि भारतीय शेयरों की कीमतें पहले से काफी ऊंचे स्तर पर हैं, जिससे नए निवेश में सावधानी बरती जा रही है।
रुपये की कमजोरी भी बनी चिंता
भारतीय रुपये में आई कमजोरी भी विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। जब रुपये की कीमत गिरती है, तो विदेशी निवेशकों को अपने निवेश पर मिलने वाला वास्तविक रिटर्न कम हो सकता है। यही कारण है कि कई निवेशक फिलहाल भारतीय बाजार से पैसा निकालकर दूसरे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
बाजार पर क्या पड़ सकता है असर?
लगातार विदेशी बिकवाली का असर बाजार की चाल पर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू निवेशकों और म्यूचुअल फंड्स की मजबूत खरीदारी ने अब तक बाजार को सहारा दिया है, लेकिन एफपीआई का रुख आने वाले महीनों में भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
