
पंजाब विधानसभा में नई कृषि मंडीकरण नीति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पंजाब सरकार में मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने इस नीति के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया और इसे तुरंत रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह नीति किसानों के हितों के खिलाफ है और इससे उनकी परेशानियां बढ़ जाएंगी।
नई नीति पर क्या है विवाद?
मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि इस नई नीति में एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का कहीं भी जिक्र नहीं है, जो किसानों के लिए बहुत चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि इस नीति को लागू करने से सरकार की APMC (कृषि उपज विपणन समिति) मंडियां खत्म हो जाएंगी और प्राइवेट मंडियों को बढ़ावा मिलेगा।
इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। अगर यह नीति लागू हो गई, तो किसान अपनी फसल को सरकारी मंडियों में बेचने की जगह प्राइवेट व्यापारियों पर निर्भर हो जाएंगे, जिससे उनके शोषण की संभावना बढ़ जाएगी।
किसानों को कैसे होगा नुकसान?
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एमएसपी की गारंटी नहीं:
- सरकार की मौजूदा मंडियों में किसानों को एमएसपी का लाभ मिलता है, लेकिन अगर मंडियां खत्म हो गईं, तो किसानों को यह सुरक्षा नहीं मिलेगी।
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प्राइवेट मंडियों को बढ़ावा:
- नई नीति निजी व्यापारियों और कंपनियों को बढ़ावा देती है, जिससे किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा।
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किसानों की मजबूरी बढ़ेगी:
- सरकारी मंडियां खत्म होने से किसान अपनी फसल बेचने के लिए व्यापारियों पर निर्भर हो जाएंगे, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है।
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राज्य की अर्थव्यवस्था पर असर:
- पंजाब की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। अगर यह नीति लागू हुई, तो इससे राज्य को भारी आर्थिक झटका लग सकता है।
पंजाब सरकार ने क्या कहा?
मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि यह नीति पंजाब के किसानों और पूरे राज्य के लिए हानिकारक हो सकती है। इसलिए इस नीति को तुरंत रद्द करने के लिए पंजाब सरकार विधानसभा में प्रस्ताव लेकर आई है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह नीति लागू हुई, तो किसानों के लिए फसल उगाना और बेचना मुश्किल हो जाएगा।