
पंजाब सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए राज्य के 191 पुलिस थानों के मुंशियों के तबादले कर दिए हैं। ये सभी कर्मचारी पिछले दो साल या उससे अधिक समय से एक ही थाने में तैनात थे। इस फैसले की जानकारी पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी कीमत पर भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है, और यह कार्रवाई उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
भ्रष्टाचार पर लगेगा अंकुश
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार को शिकायतें मिल रही थीं कि पुलिस थानों में एसएचओ, एसएसपी और डीएसपी तो बदलते रहते हैं, लेकिन मुंशी कई सालों तक एक ही स्थान पर तैनात रहते हैं। इससे भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर मुंशियों की तैनाती 8 से 10 साल तक बनी रही, जिससे पुलिस व्यवस्था में निष्पक्षता और पारदर्शिता प्रभावित हो रही थी।
उन्होंने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस संबंध में एक अहम फैसला लिया था। उनके आदेश के बाद सभी पुलिस स्टेशनों में दो साल से अधिक समय से कार्यरत मुंशियों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
आज ही जारी किए गए तबादला आदेश
मंत्री चीमा ने बताया कि आज ही 191 पुलिस थानों के मुंशियों के तबादला आदेश जारी किए गए हैं। इस फैसले से पुलिस थानों में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार को खत्म करने में मदद मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति अपना रही है और आने वाले समय में इस दिशा में और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की सख्त हिदायत
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कुछ समय पहले सभी सरकारी विभागों में निष्पक्ष और पारदर्शी प्रणाली लागू करने का निर्देश दिया था। इसी के तहत अब पुलिस प्रशासन में सुधार लाने के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। सरकार का मानना है कि यदि एक ही स्थान पर अधिकारी या कर्मचारी लंबे समय तक बना रहता है, तो वह व्यक्तिगत लाभ के लिए परिस्थितियां बना सकता है। इसलिए, हर सरकारी विभाग में ट्रांसफर पॉलिसी को सख्ती से लागू किया जा रहा है।
भविष्य में और भी सख्त कदम
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और भविष्य में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए और भी बड़े फैसले लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने के लिए ऐसे सुधार आवश्यक हैं।
191 पुलिस थानों के मुंशियों का तबादला किया गया।
8-10 साल से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों को हटाया गया।
भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री ने लिया बड़ा फैसला।
सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस सुधारों की ओर एक बड़ा कदम
इस फैसले के बाद पंजाब में पुलिस प्रशासन में निष्पक्षता और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के कड़े रुख से पुलिस और अन्य सरकारी विभागों में भी अनुशासन और जवाबदेही बढ़ेगी। पंजाब सरकार का यह फैसला राज्य में सुशासन और ईमानदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।