
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया द्वारा 3 अप्रैल को गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक से शुरू की गई नशा विरोधी मुहिम अब अमृतसर जिले में पहुंच चुकी है। यह मुहिम धीरे-धीरे एक जन आंदोलन का रूप लेती जा रही है, जिसमें आम लोग, छात्र, ग्रामीण और समाजसेवी बड़ी संख्या में जुड़ते जा रहे हैं।
नशे के खिलाफ पैदल मार्च
इस अभियान के तहत आज फतेहगढ़ चूड़ियां रोड स्थित नवां पिंड गांव से एक पैदल मार्च शुरू हुआ, जो पिंड पंधेर गांव में जाकर समाप्त हुआ। इस मार्च में बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी, ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। मार्च के दौरान लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
जन लहर बन रही है ये मुहिम: राज्यपाल कटारिया
पैदल मार्च के समापन पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि यह मुहिम सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि यह मुहिम एक जन लहर बने, क्योंकि यह किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि समाज के हित की लड़ाई है।” उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि वे नशे के खिलाफ इस अभियान का हिस्सा बनें और इसे और मजबूत करें।
नशा छुड़ाओ केंद्र खोलने पर चर्चा जारी
राज्यपाल कटारिया ने बताया कि नशा छुड़ाओ केंद्र खोलने को लेकर पंजाब सरकार से बातचीत चल रही है। इसके लिए सेना की ओर से भी प्रस्ताव आया है कि उनके अस्पतालों में ऐसे केंद्र खोले जाएं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
ड्रोन से हो रही तस्करी पर भी सख्ती
राज्यपाल ने बताया कि पाकिस्तान की सीमा से ड्रोन के माध्यम से पंजाब में नशे की तस्करी की जा रही है। इसे रोकने के लिए भारत सरकार ने एंटी-ड्रोन तकनीक विकसित की है। यह तकनीक अब पंजाब की सीमाओं पर लगाई जा रही है ताकि सीमा पार से आने वाली नशे की खेप पर रोक लगाई जा सके।
पुलिस कर्मियों के डोप टेस्ट पर विचार
राज्यपाल ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर किसी पुलिसकर्मी से नशा बरामद होता है या वह नशा सेवन करता पाया जाता है, तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि इसको लेकर राज्य सरकार से बातचीत की जाएगी और पुलिस कर्मियों के डोप टेस्ट की योजना पर विचार किया जा रहा है।
देश को नशा मुक्त बनाना लक्ष्य
गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि देशभर में नशे का फैलाव चिंता का विषय है और केंद्र सरकार की ओर से भारत को नशा मुक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज एकजुट होकर किसी बुराई के खिलाफ खड़ा होता है, तो बदलाव अवश्य आता है।
नशे के खिलाफ यह संघर्ष अब जन आंदोलन बनता जा रहा है। पंजाब में इस मुहिम से उम्मीदें जुड़ गई हैं और यह अभियान आने वाले समय में युवाओं के भविष्य को संवारने में मददगार साबित हो सकता है।