चंडीगढ़ में शराब के ठेके की बोली ने सबको चौंकाया, 4.22 करोड़ की जगह लगी 55.50 करोड़ की बोली

चंडीगढ़ में शराब के ठेके की नीलामी के दौरान एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। सेक्टर-20 में स्थित एक शराब के ठेके के लिए रखी गई नीलामी में ऐसा कुछ हुआ कि हर कोई चौंक गया। इस ठेके की रिज़र्व प्राइस 4 करोड़ 22 लाख रुपये रखी गई थी, लेकिन जब बोली खुली तो पता चला कि किसी ने इसके लिए 55 करोड़ 50 लाख रुपये की बोली लगा दी है।
पहली बार हुआ ऐसा
चंडीगढ़ के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी शराब ठेके के लिए इतनी बड़ी बोली लगाई गई है। आबकारी विभाग के अधिकारी भी इस बोली को देखकर हैरान रह गए। बोली की प्रक्रिया के दौरान कुल तीन बोलियां आई थीं। इनमें से एक बोली 55.50 करोड़ रुपये की थी, जबकि बाकी दो बोलियां 5.55 करोड़ और 5.51 करोड़ रुपये की थीं।
गड़बड़ी या साजिश?
इस हैरान करने वाली बोली को लेकर दो तरह की बातें सामने आ रही हैं। आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संभव है ये बोली गलती से लग गई हो। शायद किसी ने 5 करोड़ की जगह गलती से 55 करोड़ दर्ज कर दिए हों। हालांकि, इस पर व्यापारियों का कहना है कि यह कोई गलती नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति हो सकती है।
क्या है रणनीति?
कारोबारी वर्ग का मानना है कि यह एक प्रकार की “मोनोपोली” बनाने की कोशिश है। कोई बड़ा कारोबारी इतना ऊंचा रेट लगाकर ठेका ले लेता है ताकि और कोई दूसरा व्यापारी उस बोली में हिस्सा ही न ले सके। ऐसे में जब एक ही व्यक्ति के पास कई ठेके आ जाते हैं, तो वह मनमाने रेट पर शराब बेच सकता है और मुनाफा कमा सकता है।
शराब की कीमतों पर असर
चंडीगढ़ में शराब की बोतलों पर जो एम.आर.पी. लिखी होती है, वह असल में “न्यूनतम खुदरा मूल्य” होती है। यानी शराब ठेकेदार उससे कम कीमत पर शराब नहीं बेच सकता, लेकिन अधिकतम कीमत की कोई सीमा नहीं है। इससे यह संभावना बनती है कि अगर कोई व्यक्ति इतना महंगा ठेका लेता है, तो वह शराब के दामों में बढ़ोतरी करके अपने नुकसान की भरपाई कर सकता है।
आगे क्या होगा?
अब आबकारी विभाग ने 55 करोड़ रुपये की बोली लगाने वाले व्यक्ति को 7 दिन का समय दिया है। अगर वह तय समय में पैसा जमा नहीं करता, तो उसका 25 लाख रुपये का ईएमडी (Earnest Money Deposit) जब्त कर लिया जाएगा। विभाग की जांच टीम भी इस मामले को गंभीरता से देख रही है कि यह गलती थी या कोई साजिश।
नीलामी कैसे हुई?
इस साल चंडीगढ़ में शराब के 97 ठेकों की ई-नीलामी की गई थी। इनमें से सेक्टर-20 का यह ठेका पहले नहीं बिक पाया था, इसलिए इसके लिए दोबारा शुक्रवार को नीलामी रखी गई थी। इस नीलामी में यह चौंकाने वाली बोली सामने आई।
इस पूरी घटना ने न केवल चंडीगढ़ में, बल्कि पूरे राज्य में शराब व्यापार के तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला दर्शाता है कि किस तरह से व्यापारिक रणनीति और नीतियों का इस्तेमाल कर ठेकों पर कब्जा किया जा सकता है। अब देखना होगा कि यह बोली सही साबित होती है या इसे गलती मानकर रद्द किया जाता है।