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अगर आप टोल टैक्स देते हैं तो बदले में आपको अच्छी सड़क और सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। देशभर में कई राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) की हालत बेहद खराब है, फिर भी वाहन चालकों से पूरा टोल टैक्स वसूला जा रहा है। इस पर जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है और कहा है कि खराब सड़कों पर टोल लेना गलत है। कोर्ट ने टोल दरों को कम करने और कुछ टोल प्लाजा हटाने के आदेश दिए हैं।
खराब सड़क पर टोल टैक्स लेना लूट है!
हाईकोर्ट ने कहा कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) जरूरत से ज्यादा टोल वसूलकर अपना खजाना भर रही है, जबकि लोगों को न तो अच्छी सड़कें मिल रही हैं और न ही जरूरी सुविधाएं। निजी ठेकेदार भी मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन जनता को तकलीफ झेलनी पड़ रही है। कोर्ट ने साफ किया कि टोल वसूली जनता की सुविधा के लिए होनी चाहिए, न कि सरकार की कमाई का जरिया बनने के लिए।
NHAI की दलील खारिज
NHAI ने कहा कि सड़क निर्माण के कारण कुछ हाईवे खराब हुए हैं, लेकिन कोर्ट ने यह तर्क ठुकरा दिया। अगर सड़क पूरी नहीं बनी है या उसकी हालत खराब है, तो पूरा टोल नहीं वसूला जा सकता। खासतौर पर पठानकोट से कटरा (डोमल) तक NH-44 की हालत खराब है, जहां गड्ढे, मोड़ और रुकावटें हैं।
60 KM के अंदर नया टोल प्लाजा नहीं बनेगा
कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कई टोल प्लाजा बंद करने के आदेश दिए हैं। NH-44 पर 60 किलोमीटर के अंदर कोई नया टोल प्लाजा नहीं बनेगा। पहले से बने टोल प्लाजा दो महीनों के अंदर हटाने होंगे।
जनहित याचिका पर ऐतिहासिक फैसला
यह फैसला जनहित याचिका (PIL) के बाद आया, जिसे सुगंध साहनी ने दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि दिसंबर 2021 से हाईवे का निर्माण जारी है, फिर भी टोल वसूला जा रहा है, जबकि नियम के अनुसार काम पूरा होने के 45 दिन बाद ही टोल लिया जा सकता है।
खराब सड़कें और ज्यादा टोल – लोगों की दोहरी मुश्किल
याचिका में बताया गया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई डायवर्जन और खराब सड़कें हैं, जिससे सफर का समय 3-4 घंटे तक बढ़ जाता है। इससे लोगों को परेशानी और वाहनों को नुकसान हो रहा है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि हाल ही में बढ़े टोल चार्जेस वापस लिए जाएं और सरकार इस मामले में जल्द कार्रवाई करे।
“सड़क खराब तो टोल नहीं” – नितिन गडकरी का बयान
इस मामले में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के बयान का भी जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “अगर सड़कें खराब हैं तो टोल वसूली का कोई मतलब नहीं है।” कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि जरूरी सुधार जल्द किए जाएं और जनता को राहत दी जाए।
यह फैसला लाखों वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है, क्योंकि अब सरकार और टोल कंपनियों को बेहतर सड़कें देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।