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मणिपुर-असम बॉर्डर के पास शुक्रवार, 15 नवंबर 2024 को एक महिला और दो बच्चों के क्षत-विक्षत शव मिलने से क्षेत्र में दहशत फैल गई। शव एक नदी के पास पाए गए, जो अपहरण स्थल से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कुछ दिन पहले जिरीबाम में उग्रवादियों द्वारा एक मैतेई परिवार के छह सदस्यों का अपहरण किया गया था। अधिकारियों को संदेह है कि ये शव उसी परिवार के हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
घटना का विवरण
शवों को सिलचर भेजा गया है, जहां उनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है। यदि पहचान करना संभव नहीं होता, तो डीएनए परीक्षण किया जाएगा। घटनास्थल पर सुरक्षा बलों की टीम ने छानबीन शुरू कर दी है। इससे पहले मंगलवार, 12 नवंबर को भी दो अन्य शव जिरीबाम गांव से 15-20 किलोमीटर दूर मिले थे।
उग्रवादी हमले के बाद अपहरण
सोमवार, 11 नवंबर को सीआरपीएफ चौकी पर उग्रवादियों ने हमला किया था। इस हमले के जवाब में सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए 10 उग्रवादियों को मार गिराया था। इसके बाद उग्रवादियों ने बदले की कार्रवाई के तहत जिरीबाम गांव के एक मैतेई परिवार के छह सदस्यों (तीन महिलाएं और तीन बच्चे) को अगवा कर लिया था।
हिंसा के बीच AFSPA फिर लागू
मणिपुर में बढ़ती जातीय हिंसा के मद्देनजर केंद्र सरकार ने 14 नवंबर को पांच जिलों के छह पुलिस थानों को “अशांत क्षेत्र” घोषित करते हुए सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (AFSPA) फिर से लागू कर दिया। यह आदेश 31 मार्च 2025 तक प्रभावी रहेगा। अप्रैल 2022 में मणिपुर सरकार ने बेहतर सुरक्षा स्थिति के कारण AFSPA हटाने का निर्णय लिया था। लेकिन अब बिगड़ते हालात के चलते इसे दोबारा लागू करना पड़ा है।
स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया
अधिकारियों ने बताया कि घटनास्थल की जांच की जा रही है। शवों की पहचान के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। इस घटना ने इलाके में तनाव को और बढ़ा दिया है। स्थानीय लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था की कमी पर सवाल उठाए हैं।
स्थिति गंभीर
मणिपुर में हाल के दिनों में जातीय हिंसा और उग्रवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है। उग्रवादियों के हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण हिंसा का स्तर बढ़ रहा है। AFSPA को दोबारा लागू करना सरकार की ओर से इस स्थिति पर नियंत्रण पाने का प्रयास है, लेकिन स्थानीय लोग इसे विवादास्पद मानते हैं।
मणिपुर-असम बॉर्डर पर शवों की बरामदगी और लगातार हो रही हिंसा राज्य की गंभीर स्थिति को उजागर करती है। पुलिस और सुरक्षा बल मामले की जांच कर रहे हैं, लेकिन इस घटना ने उग्रवादी हमलों से प्रभावित क्षेत्रों में डर का माहौल पैदा कर दिया है। शवों की पहचान और अपहरण मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई जरूरी है, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके और राज्य में शांति बहाल की जा सके।