
पंजाब की राजनीति में बड़ा हड़कंप मच गया है, क्योंकि शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की Z+ सुरक्षा हटा दी गई है। इस फैसले के बाद मजीठिया ने सरकार पर जमकर निशाना साधा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
मजीठिया का गुस्सा: “गोलियां मरवाना चाहते हो?”
सुरक्षा हटाने के फैसले से नाराज बिक्रम मजीठिया ने कहा कि “अगर तुम्हें सिद्धू मूसेवाला की तरह गोली मरवानी है या सुखबीर बादल पर अटैक करवाना है, तो करो, लेकिन मैं पंजाब के मुद्दे जरूर उठाऊंगा।” उनका कहना है कि यह सरकार की साजिश है, लेकिन वे डरने वाले नहीं हैं।
AAP का पलटवार:
आम आदमी पार्टी (AAP) ने मजीठिया की सुरक्षा हटाने का समर्थन किया है। AAP के नेता अमन अरोड़ा ने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि “पंजाब में नशे के खिलाफ जंग जारी है और नशा तस्करों को सुरक्षा देने की जरूरत नहीं है।”
AAP ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, अकाली दल और बीजेपी तीनों मिलकर नशा कारोबारियों की सुरक्षा बचाने के लिए एकजुट हो रहे हैं। अरोड़ा ने कहा कि “जो लोग पंजाब में नशा खत्म नहीं होने देना चाहते, वही इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।”
“हम किसी को नहीं छोड़ेंगे” – AAP
अमन अरोड़ा ने साफ कहा कि पंजाब सरकार नशे के कारोबार में शामिल किसी भी बड़े व्यक्ति को नहीं छोड़ेगी, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। उन्होंने कहा कि “पंजाब की युवा पीढ़ी को बर्बाद करने वाले लोगों को कोई सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए।”
राजनीति गरमाई, विपक्ष ने किया हमला
इस पूरे मामले में कांग्रेस और बीजेपी भी मैदान में कूद पड़ी। कांग्रेस ने कहा कि AAP सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है। वहीं, बीजेपी ने आरोप लगाया कि पंजाब में कानून-व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है और सरकार सुरक्षा कम करके नेताओं को खतरे में डाल रही है।
क्या है सच्चाई?
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बिक्रम मजीठिया पर पहले भी नशा तस्करी के आरोप लगे हैं और उनके खिलाफ कानूनी जांच जारी है।
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AAP सरकार का दावा है कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा देने का कोई औचित्य नहीं है।
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विपक्ष का मानना है कि यह कदम सिर्फ राजनीतिक बदले की भावना से उठाया गया है।
पंजाब में राजनीतिक माहौल गर्म है और यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा मुद्दा बन सकता है। जहां एक तरफ AAP सरकार इसे नशे के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक षड्यंत्र करार दे रहा है। अब देखना होगा कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है और क्या मजीठिया की सुरक्षा बहाल होगी या नहीं।