पंजाब के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के लीगल मेट्रोलोजी विंग ने साल 2026 के पहले सात महीनों में बेहतर काम किया है। जनवरी से जुलाई तक विभाग ने नियमों के उल्लंघन के मामलों में कुल 53.26 लाख रुपये की कंपाउंडिंग फीस वसूली। यह कार्रवाई बाजार में सामान की सही मात्रा और माप सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
14 हजार से ज्यादा निरीक्षण
विभाग की ओर से जनवरी से जुलाई 2026 के बीच पूरे पंजाब में 14,412 निरीक्षण किए गए। इस दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 1,062 चालान भी किए गए। इन निरीक्षणों का मकसद यह देखना है कि दुकानदार और कारोबारी ग्राहकों को सामान सही वजन और निर्धारित मात्रा में उपलब्ध करा रहे हैं या नहीं।
मंत्री ने अधिकारियों की सराहना की
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने विभाग के अधिकारियों के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने अधिकारियों से इसी तरह तत्परता के साथ काम करने और भविष्य में जांच एवं कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की अपील की। विभाग का मानना है कि नियमित निरीक्षण से बाजार में नियमों का पालन बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सकता है।
चार शहरों में हैं मानक प्रयोगशालाएं
लीगल मेट्रोलोजी विंग के पास फिलहाल अमृतसर, लुधियाना, जालंधर और पटियाला में विभाग की अपनी मानक प्रयोगशालाएं हैं। इन प्रयोगशालाओं में माप-तौल से जुड़े उपकरणों की जांच और मानकों की पुष्टि की जाती है। इसके अलावा सरहिंद और खन्ना में भी इसी तरह की नई प्रयोगशालाएं जल्द स्थापित करने की तैयारी है।
उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा पर जोर
लीगल मेट्रोलोजी विंग की जिम्मेदारी केवल चालान करने तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में बिकने वाले सामान की मात्रा और गुणवत्ता सही हो। यानी ग्राहक को जितना सामान बताया या तौला जा रहा है, उसे वास्तव में उतनी ही मात्रा मिले और माप-तौल के उपकरण निर्धारित मानकों के अनुसार काम करें।
