दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे सैन्य संघर्ष अब ज्यादा तनावपूर्ण होते दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ रूस और यूक्रेन के बीच हमले तेज हैं, तो दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच भी फिर से सैन्य टकराव बढ़ गया है। इन घटनाओं ने यूरोप और पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
कीव में बड़ा ड्रोन हमला
यूक्रेन की राजधानी कीव में रूस के एक ड्रोन ने देश की प्रमुख सुरक्षा एजेंसी एसबीयू के मुख्यालय को निशाना बनाया। हमले में कई लोग घायल हुए और आसपास की इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब रूस और यूक्रेन के बीच हवाई हमले लगातार जारी हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले के बाद जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। यूक्रेन पहले भी रूस के भीतर ड्रोन हमले करता रहा है और अब दोनों देशों के हमले अपने-अपने क्षेत्र से काफी आगे तक पहुंच रहे हैं।
अमेरिकी दूतों की रूस-यूक्रेन यात्रा पर नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के रूस और यूक्रेन जाने की योजना भी चर्चा में है। अमेरिका चाहता है कि दोनों पक्ष इन यात्राओं के दौरान हमले रोकें, ताकि बातचीत के लिए सुरक्षित माहौल बनाया जा सके। हालांकि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म करने की शर्तों को लेकर अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है।
जर्मनी और रूस के बीच भी तनाव
यूरोप में जर्मनी ने लीपजिग एयरपोर्ट से जुड़े ड्रोन हमले की साजिश में रूस की भूमिका का आरोप लगाया है। इस मामले के बाद बर्लिन और मॉस्को के बीच तनाव और बढ़ा है। नाटो ने भी जर्मनी के साथ खड़े होने का संदेश दिया है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष फिर तेज
पश्चिम एशिया में भी हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच कुछ समय की शांति के बाद फिर मिसाइल और ड्रोन हमलों का दौर शुरू हुआ है। ईरान की ओर से अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने भी ईरानी सैन्य और समुद्री ठिकानों पर कार्रवाई की है।
इस तनाव का असर हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर भी पड़ रहा है, जो दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है। यहां किसी बड़े व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
