शनिवार देर रात जापान में भूकंप के तेज झटकों से धरती हिल उठी। यह भूकंप होन्शू द्वीप के पूर्वी तट के पास आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.0 मापी गई। झटके इतने तेज थे कि कई इमारतें हिल गईं और लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, किसी बड़े नुकसान या जान-माल की हानि की सूचना नहीं मिली है।
भूकंप का केंद्र समुद्र के भीतर
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 50 किलोमीटर गहराई में स्थित था। यह गहराई आमतौर पर मध्यम से लेकर भीषण श्रेणी के भूकंपों में देखी जाती है।
भूकंप का केंद्र समुद्र के भीतर होने के कारण तटीय इलाकों में झटके ज्यादा महसूस किए गए — जिनमें फुकुशिमा, मियागी और इवाते प्रांत शामिल हैं। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, झटके कई सेकंड तक जारी रहे, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।
सुनामी की आशंका नहीं
भूकंप समुद्र में आने के बावजूद सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई। जापान के मौसम विभाग (JMA) और Pacific Tsunami Warning Center ने बताया कि 50 किमी की गहराई पर आने वाला यह भूकंप सुनामी पैदा करने के लिए पर्याप्त नहीं था।
हालांकि, प्रशासन ने एहतियात के तौर पर तटीय क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।
लोग रातभर रहे दहशत में
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कई इलाकों में लोगों ने रात खुले स्थानों में बिताई। कई जगहों पर बिजली सप्लाई थोड़ी देर के लिए बाधित हुई, लेकिन कुछ ही घंटों में सामान्य कर दी गई।
फुकुशिमा और मियागी प्रांतों में राहत दलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी संभावित आफ्टरशॉक (भूकंप के बाद आने वाले झटके) से निपटा जा सके।
जापान में बार-बार आते हैं भूकंप
जापान दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। यह देश Pacific Ring of Fire पर स्थित है — वह क्षेत्र जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे से टकराती रहती हैं।
इसी कारण जापान में छोटे और मध्यम तीव्रता के भूकंप अक्सर आते रहते हैं। 2011 में आए 9.0 तीव्रता के भूकंप और सुनामी ने यहां भारी तबाही मचाई थी।
भूकंप से बचाव के लिए सख्त निर्माण मानक
विशेषज्ञों का कहना है कि जापान ने अपने भूकंपीय निर्माण मानकों (Seismic Building Codes) को इतना मजबूत बना लिया है कि 6.0 तीव्रता के भूकंप का असर भी सीमित रह जाता है।
सरकार लगातार नागरिकों को भूकंप से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक कर रही है और आपातकालीन अभ्यास नियमित रूप से कराए जा रहे हैं।
