FASTag सुविधा को सरकार ने इस मकसद से शुरू किया था कि टोल प्लाज़ों पर लगने वाली लंबी कतारों से लोगों को राहत मिले और टोल भुगतान डिजिटल तरीके से बिना रुकावट हो। यह प्रणाली काफी हद तक कारगर भी साबित हुई है, लेकिन अब इसमें खामियाँ भी सामने आ रही हैं।
इसी तरह का एक मामला सामने आया है पंजाब के पिंड भलूर गांव से, जहाँ के निवासी जसवीर सिंह कांडा को 27 जून 2025 की शाम 7:38 बजे एक SMS मिला जिसमें लिखा था कि उनकी अर्टिगा कार से 175 रुपए का टोल टैक्स जायतपुर टोल प्लाज़ा पर कट चुका है।
हैरानी की बात यह है कि जसवीर सिंह का कहना है कि वो उस दिन कहीं गए ही नहीं थे और उनकी गाड़ी पूरा दिन घर पर ही खड़ी थी। जसवीर के घर में CCTV कैमरे भी लगे हुए हैं, जो यह साबित कर सकते हैं कि गाड़ी कहीं नहीं गई थी। फिर भी FASTag से बिना वजह पैसा काट लिया गया।
इस घटना के बाद जसवीर सिंह ने भारत सरकार से अपील की है कि वो FASTag प्रणाली में सुधार करे और ऐसे मामलों की ठोस जांच करवाए। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या इस सिस्टम के ज़रिए कोई धोखाधड़ी या जालसाजी तो नहीं की जा रही?
उन्होंने कहा कि अगर कोई गाड़ी कहीं गई ही नहीं, तो उसके FASTag से टोल कैसे कट सकता है? यह एक गंभीर मामला है, क्योंकि ऐसी गलती से आम लोग परेशान हो रहे हैं और बिना गलती के पैसे गँवा रहे हैं।
यह अकेला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार यह सुनने को मिला है कि बंद या खड़ी गाड़ियों से टोल टैक्स कट गया। इस तरह की घटनाएँ FASTag प्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।
जसवीर सिंह ने सरकार से यह मांग की है कि FASTag सिस्टम को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए, ताकि कोई भी आम नागरिक बिना वजह की परेशानी से बच सके।
अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में यह समस्या और बढ़ सकती है। ऐसे मामलों की जांच और पैसे की वापसी की प्रक्रिया भी आसान बनाई जानी चाहिए।
FASTag से होने वाली सुविधाएं जितनी जरूरी हैं, उतनी ही जरूरी है कि यह प्रणाली सही और भरोसेमंद ढंग से काम करे। जसवीर जैसे लोग केवल एक मिसाल हैं, असल में यह समस्या देशभर में हजारों लोगों को प्रभावित कर सकती है।
