संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अध्यक्षता इस बार पाकिस्तान ने संभाली है। लेकिन इसकी शुरुआत से पहले ही भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान की आतंकवाद में भूमिका को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर कर दिया है। भारत ने न सिर्फ अपने अनुभव साझा किए, बल्कि दुनिया को यह भी बताया कि आतंकवाद सिर्फ एक देश की नहीं, पूरी मानवता की समस्या है।
‘द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ टेररिज्म’ प्रदर्शनी से झलकी सच्चाई
पाकिस्तान के अध्यक्ष बनने से ठीक एक दिन पहले, भारत ने UN मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर एक विशेष प्रदर्शनी ‘द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ टेररिज्म’ आयोजित की। इस प्रदर्शनी के माध्यम से भारत ने बताया कि आतंकवाद ने कितनी जिंदगियां तबाह की हैं — चाहे वो पठानकोट हो, पुलवामा हो या अमेरिका का 9/11 हमला।
इस प्रदर्शनी का उद्देश्य सिर्फ भारत में हुए आतंकी हमलों को दिखाना नहीं था, बल्कि यह पूरी दुनिया के सामने आतंकवाद के पीछे की साजिशों और समर्थन देने वाले देशों को बेनकाब करने का प्रयास था।
जयशंकर ने दिया सख्त संदेश
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मौके पर सख्त शब्दों में कहा,
“जब आतंकवाद को किसी देश द्वारा अपने पड़ोसी के खिलाफ समर्थन दिया जाता है, जब उसे चरमपंथी सोच से बढ़ावा मिलता है, तब यह सिर्फ हिंसा नहीं बल्कि मानवता पर हमला होता है।”
उन्होंने साफ कहा कि अब वक्त आ गया है कि ऐसे देशों की पहचान कर उन्हें वैश्विक स्तर पर उजागर किया जाए।
पाकिस्तान और चीन की साठगांठ पर इशारा
जयशंकर ने पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र में अपने ‘हमेशा के दोस्त’ चीन के साथ मिलकर काम करता है, लेकिन सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभालने के बाद उसे सभी नियमों और कूटनीतिक परंपराओं का पालन करना होगा। इसमें सभी सदस्यों को बोलने की आज़ादी देना और निष्पक्षता से प्रस्तावों पर विचार करना शामिल है।
भारत ने पहलगाम हमले का किया जिक्र
भारत ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की ओर भी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकियों की भूमिका सामने आई थी। इस हमले के जवाब में भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” चलाया और यह दिखाया कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति में कोई नरमी नहीं है।
“आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा”
जयशंकर ने अपने संबोधन में आतंकवाद को “मानवता के लिए सबसे गंभीर खतरा” बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल जान-माल का नुकसान नहीं करता, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों, मानवाधिकारों और वैश्विक शांति के सिद्धांतों के भी खिलाफ है।
उन्होंने जोड़ा,
“हर तस्वीर, हर शब्द और हर स्मृति उस जिंदगी की कहानी है जो आतंकवाद की वजह से खत्म हो गई। हम यहां सिर्फ याद करने नहीं, बल्कि उस जिम्मेदारी को निभाने आए हैं जिससे हम आगे ऐसी घटनाओं को रोक सकें।”
भारत का स्पष्ट संदेश
भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ किसी भी मंच पर चुप नहीं बैठेगा। पाकिस्तान की सुरक्षा परिषद अध्यक्षता को चुनौती देने का यह तरीका पूरी दुनिया के लिए एक सशक्त संदेश है कि अब आतंकवाद के समर्थकों को छिपने की जगह नहीं दी जाएगी।
यह प्रदर्शनी और जयशंकर का भाषण दुनियाभर के देशों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या वे भी आतंकवाद के खिलाफ अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं या नहीं।
