यूनाइटेड किंगडम (यूके) की नई सरकार, जो कि कीर स्टारमर की अगुवाई में बनी है, ने इमीग्रेशन यानी प्रवास नीति में बड़ा बदलाव किया है। इन नए नियमों का मकसद देश में आने वाले प्रवासियों की संख्या को कम करना, स्थानीय लोगों को अधिक रोज़गार के मौके देना और विदेशी कामगारों पर निर्भरता को घटाना है।
क्या है बदलाव?
ब्रिटिश संसद के निचले सदन में पेश किए गए एक नए “इमीग्रेशन व्हाइट पेपर” के ज़रिए इन सुधारों की घोषणा की गई है। सरकार ने इसे ब्रिटेन की इमीग्रेशन नीति में “पूरा रीसैट” यानी एक नई शुरुआत बताया है। इन बदलावों का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो भारत जैसे देशों से काम करने के लिए ब्रिटेन जाते हैं, खासकर स्वास्थ्य सेवा और अन्य पेशों में।
प्रमुख बदलाव क्या हैं?
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111 नौकरियों को वीज़ा सूची से हटाया गया
अब इन क्षेत्रों में काम करने वाले विदेशी कामगारों को आसानी से वीज़ा नहीं मिलेगा। -
केयर वर्कर (देखभाल करने वाले) पदों पर विदेश से भर्ती बंद
अब देखभाल के क्षेत्र में विदेशियों की भर्ती नहीं की जाएगी। -
सोशल केयर स्टाफ के लिए वीज़ा रूट बंद
यह कदम खासतौर पर उन लोगों के लिए है जो बुज़ुर्गों या बीमारों की देखभाल करते हैं। -
अंग्रेज़ी भाषा की शर्तें होंगी सख्त
अब वीज़ा के लिए अंग्रेज़ी बोलने-समझने की अधिक योग्यता जरूरी होगी। -
कम योग्यता वाले पदों पर काम को सीमित किया जाएगा
यानी अब केवल उच्च शिक्षा या विशेषज्ञता वाले लोग ही वीज़ा के योग्य होंगे। -
माइग्रेशन एडवाइजरी कमेटी करेगी समीक्षा
यह समिति अब कम वेतन वाली नौकरियों, भत्तों और ज़रूरी क्षेत्रों की समीक्षा करेगी ताकि नीतियों को और प्रभावशाली बनाया जा सके।
नए नियम कब से लागू होंगे?
ज्यादातर नए नियमों को 22 जुलाई 2025 से लागू किया जाएगा। इसके अलावा साल के अंत तक कुछ और नियम भी लागू किए जाएंगे।
भारतीयों पर क्या असर होगा?
ब्रिटेन में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं, खासकर आईटी, हेल्थकेयर और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में। अब इन नए नियमों के चलते भारतीय पेशेवरों और कामगारों को वीज़ा मिलना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।
विशेष रूप से, जो लोग केयर वर्क या अन्य कम योग्यता वाले पदों पर ब्रिटेन जाने की योजना बना रहे थे, उनके लिए रास्ता अब लगभग बंद हो गया है।
सरकार का तर्क क्या है?
ब्रिटिश गृह सचिव यवेट कूपर ने कहा कि सरकार का मकसद स्थानीय लोगों के लिए ज़्यादा नौकरियों के अवसर बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अप्रवासन चार गुना बढ़ गया था, जिससे पूरी प्रणाली असंतुलित हो गई थी। अब यह जरूरी हो गया था कि इसे फिर से संतुलित किया जाए।
सरकार अब एक नया फैमिली वीज़ा सिस्टम और इमिग्रेशन हेल्थ चार्ज में बढ़ोतरी भी करने की योजना बना रही है।
कीर स्टारमर सरकार का यह फैसला ब्रिटेन के इमीग्रेशन सिस्टम में एक बहुत बड़ा मोड़ है। इससे भारतीयों समेत सभी विदेशी नागरिकों के लिए वीज़ा प्राप्त करना कठिन हो जाएगा, लेकिन ब्रिटेन के अंदर स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिल सकता है।
यदि आप ब्रिटेन जाने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको पहले से ज्यादा हुनर, भाषा कौशल और योग्यता दिखानी पड़ेगी। ये बदलाव इमीग्रेशन को नियंत्रित करने की एक कड़ी कोशिश का हिस्सा हैं, और इसका दीर्घकालिक असर भारतीय कामगारों पर पड़ेगा।
