मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका ने बड़ा दावा किया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा है कि आने वाले कुछ घंटों में अमेरिकी एयर फोर्स को ईरान के एयरस्पेस पर पूरा नियंत्रण मिल सकता है। उन्होंने यह बात व्हाइट हाउस की नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कही।
लेविट के अनुसार अमेरिका की सैन्य कार्रवाई अभी जारी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ईरान में अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने की कोई योजना नहीं है।
सैन्य अभियान अभी शुरुआती चरण में
इससे पहले अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि ईरान के खिलाफ चल रहा अमेरिका और इज़राइल का सैन्य अभियान अभी शुरुआती चरण में है।
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन ने कहा कि जैसे-जैसे यह ऑपरेशन आगे बढ़ेगा, अमेरिकी सेना धीरे-धीरे ईरान के अंदर और गहराई तक कार्रवाई कर सकती है।
ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ा टकराव
इज़राइल डिफेंस फोर्सेज के अनुसार हाल के दिनों में ईरान और लेबनान के उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह की ओर से इज़राइल पर हमले किए गए हैं।
बताया जा रहा है कि शनिवार को ईरान पर अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए हवाई हमलों में कई लोग मारे गए। इन हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों के साथ आम नागरिकों के भी मारे जाने की खबर सामने आई है।
इन घटनाओं के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी और इज़राइली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
रूस ने दिया मध्यस्थता का संकेत
इस बढ़ते टकराव के बीच रूस ने शांति के लिए मध्यस्थता करने की इच्छा जताई है। वियना में अंतरराष्ट्रीय संगठनों में रूस के स्थायी प्रतिनिधि मिखाइल उल्यानोव ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो रूस अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि सैन्य ताकत के जरिए इस विवाद का स्थायी समाधान संभव नहीं है और अंततः बातचीत ही एकमात्र रास्ता हो सकता है।
बातचीत की संभावना पर सवाल
हालांकि उल्यानोव ने यह भी कहा कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत फिर से शुरू होना आसान नहीं दिख रहा है।
उनके अनुसार ईरान रूस की मध्यस्थता का स्वागत कर सकता है, लेकिन अमेरिका का मानना है कि वह इस स्थिति को खुद संभाल सकता है और उसे किसी मध्यस्थ की जरूरत नहीं है।
दुनिया की नजर हालात पर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। कई देशों के शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और तेल की कीमतों में भी तेजी आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव लंबा चला तो इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा हालात पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते इस तनाव पर टिकी हुई है।
