पटना स्थित तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब में शनिवार को एक विशेष और ऐतिहासिक धार्मिक समागम हुआ, जिसमें पंज प्यारे सिंह साहिबानों ने एक अहम निर्णय लेते हुए शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल को ‘तनखैया’ घोषित कर दिया। यह फैसला लंबे समय से चले आ रहे विवाद और कई बैठकों के बाद लिया गया।
क्या है ‘तनखैया’?
सिख धर्म में ‘तनखैया’ उस व्यक्ति को कहा जाता है जिसने गुरु मर्यादा, धार्मिक सिद्धांतों या तख्त के आदेशों का उल्लंघन किया हो। ऐसे व्यक्ति को धार्मिक, सामाजिक या प्रशासनिक रूप से निष्क्रिय मान लिया जाता है जब तक वह तख्त के समक्ष पेश होकर माफी न मांगे या सजा न भुगते।
पूरा मामला क्या है?
यह विवाद 21 मई 2025 से जुड़ा है जब तख्त श्री पटना साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई कुलदीप सिंह गर्गज और भाई टेक सिंह ने कुछ ऐसे आदेश जारी किए जो तख्त की मर्यादा और संविधान के खिलाफ माने गए। ये आदेश क्रमशः टैप्स/5/एच/2022, टैप्स/10/एच/2022 और टैप्स/14/एच/2022 के तहत जारी किए गए थे।
इन आदेशों ने तख्त की प्रबंधक समिति के अधिकारों में दखल दिया और 9-10 मई 2023 की समिति की बैठकों में लिए गए निर्णयों को खुली चुनौती दी। पंज प्यारों की जांच में यह बात सामने आई कि इस पूरे मामले के पीछे सुखबीर सिंह बादल की एक अहम भूमिका रही है।
तीन बार दिया गया मौका
सुखबीर सिंह बादल को अपनी बात रखने के लिए तीन बार तख्त पर पेश होने का मौका दिया गया। पहला बुलावा 21 मई 2025 को जारी किया गया, दूसरा 1 जून 2025 को और तीसरा 15 जून 2025 को, जो कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी के अनुरोध पर दिया गया था।
लेकिन सुखबीर बादल इन तीनों मौकों पर तख्त पर पेश नहीं हुए, न ही उन्होंने कोई सफाई दी।
आखिरकार आया फैसला
लगातार गैर-हाजिरी और तख्त की मर्यादा का उल्लंघन करने के चलते पंज प्यारों ने शनिवार को ऐलान किया कि सुखबीर सिंह बादल अब तनखैया घोषित किए जाते हैं। यानी अब वे धार्मिक, सामाजिक या प्रशासनिक मामलों में किसी भी प्रकार की मान्यता नहीं रखेंगे, जब तक तख्त के समक्ष पेश होकर माफी नहीं मांगते।
पहले भी हो चुके हैं सख्त फैसले
यह पहला मौका नहीं है जब तख्त श्री पटना साहिब के पंज प्यारों ने किसी बड़े नेता या धार्मिक पदाधिकारी के खिलाफ सख्त निर्णय लिया हो। इससे पहले, तख्त श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार भाई कुलदीप सिंह गर्गज और तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार टेक सिंह धनौला को भी तनखैया घोषित किया जा चुका है।
क्या होगा आगे?
इस फैसले के बाद सिख समाज और अकाली दल में हलचल मच गई है। सुखबीर बादल की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे आगे तख्त के समक्ष पेश होकर माफी मांगते हैं या इस फैसले को चुनौती देते हैं।
यह फैसला सिख धार्मिक मर्यादा की दृढ़ता और तख्त की प्रतिष्ठा को बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
