पंजाब सरकार ने प्रदेश के स्थानीय निकाय विभाग से जुड़े कर्मचारियों की यूनियनों के साथ आज एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक तीन घंटे से ज्यादा चली, जिसमें विभिन्न यूनियनों ने अपनी समस्याएं और मांगें सरकार के सामने रखीं। बैठक की अध्यक्षता स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने की।
बैठक में सरकार की तरफ से वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर, स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तेजवीर सिंह, पीएमआईडीसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीप्ति उप्पल और कार्मिक विभाग की अतिरिक्त सचिव नवजोत कौर मौजूद रहे। उन्होंने यूनियन प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिलाया।
किन-किन यूनियनों ने हिस्सा लिया?
इस बैठक में सफाई मज़दूर फेडरेशन सीवरमैन यूनियन, पंजाब जल सप्लाई और सीवरेज बोर्ड आउटसोर्स्ड वर्कर यूनियन, म्यूनिसिपल एम्पलॉइज एक्शन कमेटी, ठेकेदार कर्मचारी यूनियन, फायर सीवरमैन अनुबंध व आउटसोर्स यूनियन आदि ने भाग लिया। इन यूनियनों के प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों की दिक्कतों जैसे कि नौकरी की स्थिरता, वेतनमान, बीमा सुरक्षा, और काम की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।
सरकार का रुख सकारात्मक
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि कर्मचारियों की जायज़ मांगों को अनदेखा नहीं किया जाएगा। स्थानीय निकाय विभाग को निर्देश दिए गए कि वह यूनियनों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर जल्द एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करे। साथ ही, कर्मचारियों को ग्रुप बीमा कवरेज देने की संभावनाएं तलाशने के लिए भी कहा गया।
मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता दोहराई गई
सब-कमेटी ने सभी यूनियन प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार कर्मचारियों की भलाई के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बैठक में दोहराया गया कि सरकार केवल संवाद तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई भी करेगी।
यूनियन प्रतिनिधियों की भागीदारी
बैठक में राज़ा हंस, नरेश कुमार, जुगिंदरपाल (सीवरमैन यूनियन), गुरदेव सिंह, बलदेव सिंह, अमित कुमार (आउटसोर्स वर्कर यूनियन), गोपाल थापर, कुलवंत सिंह सैनी (म्यूनिसिपल एक्शन कमेटी), शेर सिंह खन्ना, गगनदीप सिंह (ठेका कर्मचारी यूनियन), विनोद बिट्टा, सुरिंदर टोना, पवन गोडियाल (सफाई मजदूर फेडरेशन), सोभा सिंह, साहिब सिंह और अमनजोत सिंह (फायर सीवरमैन यूनियन) जैसे नेताओं ने हिस्सा लिया।
यह बैठक राज्य में कर्मचारियों और सरकार के बीच बेहतर संवाद और विश्वास की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। इससे आने वाले समय में कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान शीघ्र और स्थायी रूप से होने की उम्मीद है।
