भारतीय क्रिकेट टीम के नए मुख्य कोच गौतम गंभीर ने हाल ही में बीसीसीआई (BCCI) द्वारा बनाए गए परिवारों की यात्रा से जुड़े नियमों का समर्थन किया है। ये नियम भारत की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1-3 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी हार के बाद 2024-25 सत्र में लागू किए गए। इसके अनुसार, 45 दिनों से ज्यादा लंबे दौरे में खिलाड़ियों के परिवार सिर्फ 14 दिन तक उनके साथ रह सकते हैं, जबकि छोटे दौरे में यह सीमा 7 दिन की होगी।
गंभीर की सोच: ‘देश पहले, बाकी बाद में’
चेतेश्वर पुजारा के साथ एक खास बातचीत में गौतम गंभीर ने कहा, “परिवार जरूरी हैं, लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि हम यहां छुट्टी मनाने नहीं आए हैं। हम देश का प्रतिनिधित्व करने आए हैं, और यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं परिवारों के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन जब आप राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हों, तो देश को गर्व दिलाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। आप भाग्यशाली हैं कि आपको यह मौका मिला है।”
गंभीर ने बताया कि जब टीम ने पिछला टेस्ट मैच जीता, तब भी उनका दिमाग अगले मुकाबले की तैयारी में लग गया था। उन्होंने कहा, “मैं कमरे में गया और सोचने लगा कि अगली प्लेइंग इलेवन क्या होगी, किस संयोजन से हम अगला मैच जीत सकते हैं। मैं आज तक यह नहीं समझ पाया कि कैसे खुद को आराम करने के लिए ‘स्विच ऑफ’ किया जाए।”
विराट कोहली की भावनात्मक प्रतिक्रिया
दूसरी तरफ, पूर्व कप्तान विराट कोहली का इस मुद्दे पर नजरिया थोड़ा अलग है। उन्होंने RCB इनोवेशन लैब इंडियन स्पोर्ट्स समिट में कहा, “लोगों को समझ नहीं आता कि जब खिलाड़ी मुश्किल दौर में होते हैं, तो परिवार का साथ उन्हें मानसिक शांति देता है। जब मैदान के बाहर तनाव होता है, तब अपने करीबी लोगों के पास जाना बहुत सुकून देता है।”
कोहली ने कहा, “मुझे दुख होता है कि जो लोग इस माहौल को नहीं समझते, वे राय देने लगते हैं। अगर किसी भी खिलाड़ी से पूछा जाए कि क्या वह चाहता है कि उसका परिवार साथ रहे, तो वह ‘हां’ कहेगा। मैं अकेले कमरे में बैठकर दुखी नहीं रहना चाहता। मैं एक सामान्य इंसान की तरह जीवन जीना चाहता हूं।”
खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति पर बहस
गंभीर और कोहली की बातें इस ओर इशारा करती हैं कि खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। गंभीर का मानना है कि देश के लिए खेलना सर्वोपरि है, वहीं कोहली का कहना है कि मानसिक शांति के लिए परिवार जरूरी है। दोनों के विचार अलग जरूर हैं, लेकिन दोनों ही खिलाड़ियों ने टीम की भलाई और जीत को पहली प्राथमिकता बताया।
बीसीसीआई का नया नियम खिलाड़ियों की पेशेवर प्रतिबद्धता और मानसिक संतुलन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। गौतम गंभीर इसके सख्त समर्थन में हैं और इसे टीम की एकाग्रता और प्रदर्शन के लिए जरूरी मानते हैं। वहीं विराट कोहली का मानना है कि परिवार साथ हो तो खिलाड़ी बेहतर महसूस करते हैं और खेल में उनका ध्यान बेहतर होता है।
अंततः, यह साफ है कि खिलाड़ियों की भावनात्मक और मानसिक ज़रूरतों के साथ-साथ टीम की जीत और राष्ट्र का गौरव – दोनों का संतुलन जरूरी है। बीसीसीआई को आने वाले समय में खिलाड़ियों से संवाद बनाकर इन नीतियों को और संवेदनशील बनाने की ज़रूरत होगी।
