भारत और ब्राजील के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। हाल ही में ब्राजील की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) और भारत की महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स ने एक अहम समझौता किया है। इसके तहत दोनों देश C-390 मिलेनियम नामक एक मध्यम परिवहन विमान (Medium Transport Aircraft) को भारत में मिलकर बनाएंगे। यह विमान भारतीय वायुसेना (IAF) के पुराने विमानों की जगह ले सकता है और देश की सामरिक क्षमता को बढ़ा सकता है।
क्या है C-390 मिलेनियम?
C-390 मिलेनियम एक दोन इंजनों वाला जेट-संचालित सैन्य परिवहन विमान है, जिसे ब्राजील की एम्ब्रेयर कंपनी ने डिजाइन किया है। यह विमान 2019 से ब्राजील की वायुसेना में सेवा दे रहा है और इसकी खासियत है:
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26 टन पेलोड क्षमता – यह दो M113 बख्तरबंद वाहन, एक हेलिकॉप्टर या 80 सैनिकों को लेकर उड़ सकता है।
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उच्च गति और विश्वसनीयता – यह तेज, टिकाऊ और कम लागत में ऑपरेट होने वाला विमान है।
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यह विमान लद्दाख जैसे ऊंचे और कठिन इलाकों में भी काम करने में सक्षम है।
भारत के लिए फायदे
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पुराने विमानों की जगह लेगा
अभी IAF के पास An-32 जैसे पुराने विमान हैं, जिनकी क्षमता सीमित है। C-390 इनकी जगह लेकर भारत की ट्रांसपोर्ट क्षमता बढ़ाएगा। -
मेक इन इंडिया को बढ़ावा
एम्ब्रेयर और महिंद्रा भारत में ही C-390 की फाइनल असेंबली लाइन लगाएंगे। इससे स्थानीय रोजगार मिलेगा, तकनीक का स्थानांतरण होगा और भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में C-390 का उत्पादन हब बन सकता है। -
निर्यात की संभावना
भारत में बना C-390 विमान वियतनाम, इंडोनेशिया, फिलीपींस जैसे देशों को भी बेचा जा सकता है, जिससे रक्षा निर्यात में बढ़ोतरी होगी। -
तकनीकी विकास में मदद
भारत की सरकारी कंपनी BEL (भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड) रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और एवियोनिक्स सिस्टम में सहयोग कर सकती है। इससे भारत की तकनीकी क्षमता बढ़ेगी। -
लागत में भी फायदेमंद
C-390 की कीमत $140-160 मिलियन के बीच है, जो इसके मुकाबले वाले विमानों से कम या बराबर है। इसकी कम परिचालन लागत और ज्यादा विश्वसनीयता लंबे समय में भारत के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक होगी।
ब्राजील को भारत में क्या दिलचस्पी?
ब्राजील भारत के आकाश मिसाइल सिस्टम, गरुड़ तोप प्रणाली और तटीय निगरानी तकनीक में भी रुचि दिखा रहा है। आकाश मिसाइल की रेंज 4 से 25 किलोमीटर तक है और यह ड्रोन, फाइटर जेट जैसे लक्ष्यों को मार गिरा सकती है। यह सिस्टम 82% तक स्वदेशी है और इसे और आत्मनिर्भर बनाने की योजना है।
पहले भी रहा है भारत-ब्राजील सहयोग
भारत ने पहले ही एम्ब्रेयर के ERJ-145 विमान प्लेटफॉर्म पर आधारित ‘नेत्रा AWACS‘ प्रणाली बनाई है, जो निगरानी और खुफिया जानकारी में मदद करती है। अब दोनों देश नई पीढ़ी की हवाई चेतावनी प्रणाली पर भी मिलकर काम कर रहे हैं।
भारत और ब्राजील, दोनों ही देश रक्षा क्षेत्र में एक-दूसरे के पूरक बनते जा रहे हैं। एक ओर भारत के पास मजबूत स्वदेशी मिसाइल और तोप प्रणाली है, वहीं ब्राजील उन्नत एयरक्राफ्ट तकनीक में माहिर है। C-390 मिलेनियम जैसी साझेदारियों से न सिर्फ भारतीय वायुसेना को आधुनिक बनाया जा सकता है, बल्कि भारत को एक वैश्विक रक्षा निर्माण केंद्र भी बनाया जा सकता है।
यह साझेदारी आने वाले समय में दोनों देशों के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
