अब चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पूरी तरह से सौर ऊर्जा से जगमगाएगा। रेलवे ने स्टेशन पर 1350 किलोवाट बिजली खुद पैदा करने की योजना बनाई है। इसके लिए स्टेशन की छतों और अन्य स्थानों पर सोलर पैनल लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। यह कदम न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि इससे बिजली की लागत में भी भारी कमी आएगी।
रेलवे लैंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) द्वारा चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर जो नई इमारत बनाई जा रही है, उसकी छत पर सोलर पैनल लगाने का काम तेजी से चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार, चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन की कोशिश है कि वह अपनी जरूरत की बिजली खुद ही सौर ऊर्जा से तैयार करे, ताकि बिजली विभाग पर बोझ न पड़े।
जानकारी के अनुसार, स्टेशन के पंचकूला की तरफ बनाए जा रहे शेल्टरों पर भी जल्द ही सोलर पैनल लगाने का काम शुरू हो जाएगा। इससे पहले जब रेलवे स्टेशन पर पुनर्निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ था, तब यहां की रोजाना बिजली की खपत 500 किलोवाट से भी ज्यादा थी। लेकिन अब निर्माण कार्य के चलते कई हिस्सों में बदलाव हो रहे हैं, जिससे मौजूदा बिजली खपत का सही अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल है।
फिर भी, अधिकारियों का कहना है कि पहले स्टेशन अपनी कुल बिजली खपत का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा कर रहा था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अब 1350 किलोवाट की सोलर पैनल प्रणाली तैयार की जा रही है, जिससे स्टेशन की संपूर्ण जरूरतें पूरी की जा सकें।
रेलवे की इस योजना के तहत प्लेटफॉर्म की छतों, दोनों ओर की इमारतों, पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए शेल्टरों और पार्किंग क्षेत्रों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे दिन के समय स्टेशन को मिलने वाली बिजली सौर ऊर्जा से ही पूरी की जा सकेगी।
यह कदम देश के उन रेलवे स्टेशनों की तरफ एक मजबूत पहल है, जो पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इससे चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन न केवल बिजली की बचत करेगा, बल्कि एक ग्रीन स्टेशन के रूप में मिसाल भी बनेगा।
रेलवे के इस प्रयास से उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में देश के और भी स्टेशन इस मॉडल को अपनाएंगे और सौर ऊर्जा की मदद से स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।
