भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और उनके तीन साथी आज यानी सोमवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से धरती की ओर वापसी के लिए रवाना होंगे। यह मिशन अमेरिका की निजी कंपनी Axiom Space द्वारा संचालित किया गया, जिसे “Axiom-4” नाम दिया गया है। शुभांशु शुक्ला ऐसे दूसरे भारतीय हैं जिन्होंने अंतरिक्ष की यात्रा की है। उनसे पहले केवल राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत मिशन के तहत अंतरिक्ष की यात्रा की थी।
Axiom Space ने बताया कि शुक्ला और उनके साथी भारतीय समय अनुसार दोपहर 2 बजे ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में सवार होंगे और दो घंटे बाद वापसी के लिए प्रस्थान करेंगे। स्पेसक्राफ्ट के ISS से अलग होने का समय शाम 4:35 बजे के आसपास तय किया गया है। करीब 22.5 घंटे की यात्रा के बाद, यह टीम कैलिफोर्निया के तट पर मंगलवार दोपहर 3:01 बजे (भारतीय समय अनुसार) लैंड करेगी।
इस मिशन में शुक्ला के साथ तीन और यात्री शामिल हैं: अमेरिका की अनुभवी कमांडर पैगी विटसन, पोलैंड के सलावोय उज़नस्की और हंगरी के टिबोर कापू। इस मिशन के जरिए भारत, पोलैंड और हंगरी दशकों बाद फिर अंतरिक्ष में पहुंचे हैं।
रविवार को ISS में एक विदाई समारोह हुआ, जिसमें शुक्ला ने भावुक होकर कहा, “जल्द ही धरती पर मिलते हैं।” उन्होंने राकेश शर्मा का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब वे 41 साल पहले अंतरिक्ष में गए थे, तो उन्होंने बताया था कि ऊपर से भारत कैसा दिखता है। शुक्ला ने कहा, “आज का भारत आत्मविश्वासी, साहसी और गौरवशाली दिखता है। आज भी भारत ‘सारे जहाँ से अच्छा’ लगता है।”
ड्रैगन यान की वापसी की प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटिक है। यान के अलग होने के बाद इसके इंजन काम करेंगे ताकि यह सुरक्षित दूरी पर पहुंच सके और फिर वायुमंडल में प्रवेश की तैयारी कर सके। इस दौरान यान लगभग 1,600 डिग्री सेल्सियस के तापमान का सामना करेगा। फिर दो चरणों में पैराशूट खुलेंगे – पहले 5.7 किमी की ऊँचाई पर स्टेबिलाइजिंग पैराशूट और फिर 2 किमी की ऊँचाई पर मुख्य पैराशूट। यान को एक विशेष जहाज द्वारा समुद्र से उठाकर वापस लाया जाएगा।
शुक्ला ने बताया कि 25 जून को जब वे फाल्कन-9 रॉकेट से रवाना हुए थे, तब उन्होंने सोचा भी नहीं था कि यह यात्रा इतनी खास बन जाएगी। उन्होंने कहा कि ISS पर मौजूद अन्य यात्रियों के साथ बिताया समय उनकी ज़िंदगी का यादगार अनुभव रहेगा।
यह यात्रा न सिर्फ भारत के लिए गर्व की बात है, बल्कि इसरो (ISRO) के भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशन “गगनयान” की योजना के लिए भी बेहद अहम है। शुक्ला की इस यात्रा के लिए भारत सरकार और इसरो ने लगभग 550 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। गगनयान मिशन को 2027 तक पूरी तरह कार्यान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।
शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा भारत के लिए एक बड़ा कदम है और यह दिखाता है कि भारत अब अंतरिक्ष अनुसंधान में आत्मनिर्भर और महत्वाकांक्षी बन चुका है।
