पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में एक बेहद अहम फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने धर्मग्रंथों की बेअदबी से जुड़े बिल पर चर्चा करते हुए कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले सभी धर्मों के लोगों और संगठनों की राय ली जाएगी। उन्होंने सदन में स्पष्ट किया कि यह कानून ऐसा होना चाहिए जो सभी को स्वीकार हो, और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बने।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक बिल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और भावनाओं का विषय है। इसलिए सरकार इस पर जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य के 3 करोड़ लोगों से राय ली जाएगी और सभी धार्मिक जत्थेबंदियों से भी बातचीत की जाएगी। भगवंत मान ने कहा कि जब तक सभी की सहमति नहीं बनती, तब तक इस कानून को पास नहीं किया जाएगा।
बिल जाएगा सिलेक्ट कमेटी के पास
मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने भी सहमति जताई। तय किया गया कि अब यह बिल एक सिलेक्ट कमेटी को सौंपा जाएगा, जिसे विधानसभा अध्यक्ष गठित करेंगे। यह कमेटी अगले 6 महीनों में लोगों से राय लेकर अपनी रिपोर्ट सदन में पेश करेगी। इसके बाद ही इस बिल को पास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने रखी भावनात्मक बात
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन में बोलते हुए कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सिख धर्म में जिंदा गुरु माना जाता है। पिछले वर्षों में जो घटनाएं हुईं, उन्होंने सभी धर्मों के लोगों को आहत किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी करते हैं, वे कुछ सालों बाद जेल से बाहर आकर फिर से समाज में सम्मान पाने लगते हैं, जो बहुत ही दुखद है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि कोई दोबारा ऐसी हिमाकत न करे।
पर्यावरण पर भी बोले मुख्यमंत्री
अपने संबोधन में भगवंत मान ने पर्यावरण की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पराली जलाने, दिवाली और दशहरे पर पटाखों से पंजाब में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। उन्होंने मजाक में कहा कि लगता है अब हम ऑक्सीजन नहीं, बल्कि किसी और गैस पर जी रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि हम सबको मिलकर पर्यावरण को बचाना चाहिए।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कहा कि जो भी व्यक्ति किसी भी पवित्र ग्रंथ की बेअदबी करेगा, वह फिर बाहर नहीं आ सकेगा। अब इस बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजकर जनता और धार्मिक संगठनों की राय के साथ इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। यह कदम दिखाता है कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।
