पंजाब में धार्मिक भावनाओं की रक्षा और पवित्र धार्मिक ग्रंथों के अपमान को रोकने के लिए सरकार ने एक अहम पहल की है। “पवित्र धार्मिक ग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम विधेयक 2025” को लेकर पंजाब विधानसभा में एक 15 सदस्यीय चयन समिति (सेलेक्ट कमेटी) का गठन किया गया है। इस समिति का उद्देश्य है – इस संवेदनशील विधेयक की गहराई से समीक्षा करना, ज़रूरी सुझाव देना और इसे प्रभावी बनाना।
समिति का नेतृत्व और सदस्य
इस समिति की अध्यक्षता इंदरबीर सिंह निज्जर कर रहे हैं। समिति में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें सत्ताधारी और विपक्षी दोनों दलों के विधायक शामिल किए गए हैं, ताकि सभी विचारों को महत्व दिया जा सके। सदस्य हैं:
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अजय गुप्ता
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अमनदीप कौर अरोड़ा
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इंदरजीत कौर मान
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जगदीप कंबोज
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जंगी लाल महाजन
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तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा
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नीना मित्तल
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प्रो. बलजिंदर कौर
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प्रो. बुधराम
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ब्रह्मा शंकर जिम्पा
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बलविंदर सिंह धालीवाल
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मदन लाल बंगा
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मनप्रीत सिंह अयाली
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मोहम्मद जमील रहमान
समिति का उद्देश्य क्या है
यह समिति विधेयक की हर धारा और प्रावधान की बारीकी से समीक्षा करेगी और यह देखेगी कि उसमें किसी भी वर्ग, धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि जो लोग पवित्र धार्मिक ग्रंथों के अपमान या किसी अन्य आपत्तिजनक कार्य में शामिल पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त और स्पष्ट कानूनी कार्रवाई हो सके।
आगे की प्रक्रिया क्या होगी
चयन समिति जल्द ही अपनी बैठकों की शुरुआत करेगी और विभिन्न विशेषज्ञों, धार्मिक प्रतिनिधियों तथा आम जनता से विचार-विमर्श कर सकती है। समिति की सिफारिशों के बाद विधेयक को अंतिम रूप देकर विधानसभा में दोबारा पेश किया जाएगा।
यह कदम पंजाब सरकार की धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस विधेयक के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि पवित्र ग्रंथों का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
