शनिवार सुबह चंडीगढ़ की हवा में अचानक तनाव घुल गया जब सेक्टर 53/54 की फर्नीचर मार्केट में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई देखने को मिली। अवैध घोषित की गई इस मार्केट पर बुलडोजर चलाकर प्रशासन ने 116 दुकानों को धराशायी कर दिया। वर्षों पुरानी यह मार्केट एक झटके में मलबे में बदल गई और दुकानदारों की आँखों में आंसू छोड़ गई।
कार्रवाई की सुबह क्या क्या हुआ
कार्रवाई सुबह-सुबह शुरू हुई, जब अधिकांश दुकानदार या तो घर पर थे या दुकान खाली करने में लगे थे। सड़कों के दोनों ओर ट्रैफिक को रोक दिया गया और इलाके की घेराबंदी कर दी गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए भारी पुलिस बल मौके पर तैनात था। प्रशासन ने पहले ही दुकानदारों को नोटिस देकर अलर्ट कर दिया था, लेकिन फिर भी कई दुकानें खाली नहीं हुई थीं।
वर्षों पुरानी मार्केट, अब सिर्फ मलबा
यह फर्नीचर मार्केट न सिर्फ चंडीगढ़ बल्कि पंजाब और हरियाणा के ग्राहकों के लिए एक बड़ा केंद्र थी। लोग यहां सस्ते और क्वालिटी फर्नीचर की तलाश में आते थे। लेकिन प्रशासन का कहना है कि यह ज़मीन सरकारी है और उस पर अवैध कब्जा किया गया था।
दुकानदारों का ग़ुस्सा, रोज़ी-रोटी पर संकट
कार्रवाई के बाद दुकानदार बेहद आहत और नाराज़ दिखाई दिए। “हमें कोई वैकल्पिक जगह नहीं दी गई, हम अब जाएं तो कहां जाएं?” – एक बुज़ुर्ग दुकानदार ने रोते हुए कहा। कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों से फर्नीचर हटा लिया था, लेकिन कुछ का लाखों का सामान बुलडोजर की चपेट में आ गया।
प्रशासन की सफाई – कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई
प्रशासन का दावा है कि उन्होंने दुकानदारों को कई बार नोटिस दिया, लेकिन जवाब नहीं मिला। कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की गई और कानून का पालन करते हुए जमीन को खाली करवाया गया। “यह अतिक्रमण था, जिसे हटाना ज़रूरी था।” – एक अधिकारी ने बताया।
सामाजिक संगठनों की अपील – दुकानदारों का पुनर्वास हो
इस घटना के बाद कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने इस कार्रवाई को “अमानवीय” बताया और मांग की कि प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास की योजना बनाई जाए।
क्या आगे दुकानदारों को मिलेगा नया ठिकाना?
फिलहाल मार्केट के स्थान पर मलबा और सन्नाटा पसरा है। अब सबकी नज़र इस पर टिकी है कि प्रशासन दुकानदारों के लिए क्या योजना लाता है?
