पंजाब के परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने सोमवार को एक अहम कदम उठाते हुए भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति को दोहराया और विभाग में कड़ी कार्रवाई की।
भुल्लर ने बताया कि जनता की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा, “अब हर हाल में पारदर्शिता और समय पर सेवा देना हमारी प्राथमिकता है। जो भी अफसर या कर्मचारी जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
क्या हुई कार्रवाई?
- दो नियमित क्लर्कों को तुरंत निलंबित कर दिया गया है।
- चार आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
- एक डिप्टी स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को शो कॉज नोटिस जारी कर 48 घंटे के अंदर जवाब मांगा गया है।
आरोप क्या थे?
सूत्रों के अनुसार, जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है, वे लाइसेंस और परमिट जारी करने के दौरान रिश्वत लेने और फाइलों को जानबूझकर लटकाने जैसे गंभीर आरोपों में घिरे थे। शुरुआती जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद तुरंत यह कदम उठाया गया।
मंत्री ने कहा, “हम जनता का विश्वास वापस लाना चाहते हैं और इसके लिए जो भी करना पड़े, हम करेंगे। विभागीय जांच तेज़ी से पूरी कर मामले की चार्जशीट अदालत में पेश की जाएगी।”



विभागों को निर्देश
मंत्री भुल्लर ने सभी आरटीए (क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण) दफ्तरों को आदेश दिया है कि वे सात दिनों के भीतर लंबित मामलों की रिपोर्ट सौंपें। इसके साथ ही हर काउंटर पर लगे सीसीटीवी कैमरों की नियमित ऑडिट करने को भी कहा गया है, ताकि गड़बड़ियों की तुरंत पहचान की जा सके।
सरकार की मंशा साफ
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री भगवंत मान की “स्वच्छ प्रशासन” नीति के तहत की गई है, जिसमें हर विभाग को ईमानदारी और जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का मानना है कि ई-गवर्नेंस और तकनीकी निगरानी के ज़रिए जनता को बेहतर सेवाएं मिलेंगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सकेगी।
इस कदम से साफ है कि पंजाब सरकार लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी और जनसेवा में किसी भी तरह की कोताही पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
