संगरूर से आम आदमी पार्टी के लोकसभा सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने संसद में “ऑपरेशन सिंदूर” पर जारी बहस में हिस्सा लेते हुए केंद्र सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सबसे पहले शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और उनकी बहादुरी को नमन करते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ जारी संघर्ष के समय, “विश्व गुरु” कहे जाने वाले भारत को कोई भी बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला। उन्होंने कहा कि चीन और तुर्की जैसे देश खुलेआम पाकिस्तान के समर्थन में खड़े रहे, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी पाकिस्तान को उसी समय वित्तीय सहायता दे दी।
विदेशी दौरों पर गई टीम को नहीं मिला सम्मान
मीत हेयर ने कहा कि भारत से गए संसदीय प्रतिनिधिमंडल को अधिकांश विदेशी दौरे पर कैबिनेट स्तर के नेता तक नहीं मिले। केवल कुछ गिने-चुने देशों को छोड़कर, अधिकतर देशों ने उचित राजनयिक स्वागत नहीं किया, जो विदेश नीति की विफलता को दर्शाता है।
बड़ी चूक के बावजूद किसी ने नहीं ली जिम्मेदारी
लोकसभा सांसद ने कहा कि जब कभी देश में रेल हादसे जैसी छोटी घटनाएं होती थीं, तब मंत्री नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देते थे, लेकिन इतने बड़े आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो जाने के बावजूद न तो किसी ने इस्तीफा दिया और न ही जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा कि खुफिया तंत्र की लापरवाही के कारण यह हमला हुआ, लेकिन सरकार में किसी ने भी इसकी जवाबदेही नहीं स्वीकारी।
लंबी तकरीरों में नहीं मिला जनता के सवालों का जवाब
मीत हेयर ने रक्षा मंत्री और गृह मंत्री की लंबी तकरीरों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश की जनता जिन सवालों के जवाब चाहती थी, उन पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया या टीवी पर जंग देखने वाले बाकी देशवासियों से अलग, पंजाब जैसे बॉर्डर राज्य के लोग हर दिन ड्रोन हमलों, सायरनों और ब्लैकआउट के बीच जीने को मजबूर रहे। गुरमीत सिंह मीत हेयर ने अपने भाषण में सरकार की कूटनीतिक और आंतरिक सुरक्षा नीतियों की विफलताओं को उजागर करते हुए कहा कि भारत को यदि सच में “विश्व गुरु” बनना है, तो उसे जमीनी स्तर पर मजबूत विदेश नीति और जवाबदेही की ज़रूरत है।
