शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को आज मोहाली की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत को 14 दिन के लिए बढ़ा दिया, जो अब 14 अगस्त 2025 तक जारी रहेगी। गौरतलब है कि उनकी पिछली हिरासत की अवधि आज समाप्त हो रही थी।
बैरक बदलने की याचिका पर 6 अगस्त को सुनवाई
मजीठिया की ओर से जेल में बैरक बदलने की याचिका भी अदालत में दायर की गई थी, जिस पर आज सुनवाई होनी थी। हालांकि अदालत ने इस सुनवाई को 6 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए 14 अगस्त को मजीठिया की अगली पेशी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही की जाएगी।
25 जून को विजिलेंस ने किया था गिरफ्तार
बिक्रम मजीठिया को विजिलेंस ब्यूरो ने 25 जून 2025 को अमृतसर से गिरफ़्तार किया था। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। इससे पहले भी, वर्ष 2021 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान, उनके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज़, कई संपत्तियों पर छापे
अब तक इस मामले में पूर्व डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, ईडी के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर, समेत कुल 6 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। मजीठिया की संपत्तियों पर पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में छापेमारी की जा चुकी है। राज्य सरकार का दावा है कि उनके पास इस मामले में पुख्ता सबूत हैं, जबकि मजीठिया के वकीलों का कहना है कि यह राजनीतिक द्वेष से प्रेरित और बेबुनियाद मामला है।
अकाली दल ने सरकार पर लगाया मनमानी का आरोप
बिक्रम सिंह मजीठिया नाभा जेल में बंद हैं। शिरोमणि अकाली दल ने आरोप लगाया है कि पार्टी के नेताओं को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। हाल ही में सुखबीर सिंह बादल, डा. दलजीत सिंह चीमा और अन्य तीन नेता मजीठिया से मिलने गए थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। अकाली दल ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन करार दिया है और सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
